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नगर निगम में सत्तापक्ष का महासंग्राम, भाजपाई पार्षद खुद फाड़ रहे एक – दूसरे के कपड़े, आने वाले समय में क्या कुछ और पार्षद छोड़ सकते पद ? क्या है इस्तीफे की इनसाइड स्टोरी ….!

कटनी ( आशीष सोनी )। नगर निगम चुनाव को कम समय शेष रह गया है, लिहाजा सदन की बैठकों में पार्षदों के तेवर तल्ख होने लगे है। इसकी बानगी आज नगर निगम परिषद के सम्मेलन में पार्षद ओमप्रकाश सोनी के इस्तीफे के बतौर सामने आई। हालांकि अपने इस्तीफे की पेशकश उन्होंने आज नगर निगम के अध्यक्ष के सामने ही की, लेकिन कल वे अपने वार्ड की जनता को साथ लेकर कलेक्टर से मिलेंगे और पार्षद पद से अपना त्याग पत्र सौंप देंगे। नियमानुसार कलेक्टर इसे संभागायुक्त को प्रेषित करेंगे और वहां इस्तीफे पर फैसला हो जाएगा। अगर इस्तीफा स्वीकृत हुआ तो निकाय चुनाव से पहले ही शहर में एक और वार्ड रिक्त हो जाएगा। वैसे भी माधवनगर के एक वार्ड में उपचुनाव प्रस्तावित था। चुनाव की तारीख भी आ चुकी थी, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया।
कटनी नगर निगम अब पूरी तरह से सियासत का अखाड़ा बन चुका है। मजे की बात तो यह है कि इस अखाड़े में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के ही पहलवान एक दूसरे के कपड़े फाड़ने में लगे है। आज की बैठक में विपक्ष के तौर पर कांग्रेस तो अपने मुद्दों के साथ तमाशबीन ही रही, लेकिन सत्तापक्ष के पार्षदों ने सीधे तौर पर गुटीय खींचतान को सामने ला दिया। इस कार्यकाल की यह विडम्बना है कि शुरुआत से ही सत्तादल के पार्षद दो खेमों में बटे हुए हैं। परिषद को चार साल पूरे हो चुके है और यह पांचवां और अंतिम वर्ष विकास कार्यों के हिसाब से बेहद महत्व का है, बावजूद इसके निगम के अंदर परिषद की बैठकों में पार्षदों के बीच तल्खी कम होने की बजाय बढ़ती जा रही है। पार्षदों का एक समूह मौजूद राजनीतिक केंद्र के साथ है तो दूसरा उन्हें लगातार निशाने पर लेता आया है। मुद्दों के बहाने एक दूसरे को घेरने के कोई मौके नहीं छोड़े जा रहे। सवाल यही है कि क्या यह पूरा कार्यकाल सत्तापक्ष की आपसी खींचतान में निकल जायेगा। जनता इन तमाम स्थितियों को देख रही है। जनता ने जिन जन प्रतिनिधियों को चुनकर सदन में भेजा है वे अपनी भूमिका का निर्वाह किस तरह से कर रहे है, इस पर नगर निगम का अगला परिदृश्य सामने आएगा। चुनाव को अब केवल बमुश्किल नौ माह का समय बचा है, ऐसे में पार्षद भी अब अपनी जमीन बचाने की कवायद में जुट चुके है। इंदिरा गांधी वार्ड के पार्षद बल्ली सोनी को क्या इसी सोच से जोड़कर देखा जाए। यशभारत से बातचीत में वे साफ कहते है कि जब वे जनता के प्रति अपना दायित्व पूरा कर ही नहीं पा रहे, तब पद पर रहने का क्या औचित्य? इसलिए उन्होंने पद छोड़ देना ही ज्यादा मुनासिब समझा। कल वे वार्ड की जनता के साथ बकायदा अपना इस्तीफा कलेक्टर आशीष तिवारी को सौंप देंगे।

इस्तीफे के पीछे की सियासत?

इस इस्तीफे की पटकथा किस सोच के तहत और कहां तैयार हुई, इसको लेकर अब चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्र बताते हैं कि एक पार्षद के इस्तीफे के जरिए नगर निगम के मौजूदा पावर सेंटर को सीधे दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है, ताकि उन पर परिषद के अन्य सदस्यों के साथ खुदकी पार्टी का दबाव भी बढ़ जाए। दूसरी स्थिति यह है कि शहर में लगे हाथ यह भी संदेश दे दिया जाए कि अगर नगर सरकार में पार्षदों के ही काम नहीं हो रहे तो फिर उस पावर सेंटर से कोई अपेक्षा की ही क्यों जाए और पार्टी आने वाले समय में इसका मूल्यांकन करे। महापौर प्रीति सूरी का कहना है कि उन्होंने विकास कार्यों में कभी पक्षपात नहीं किया। हर वार्ड में करोड़ों के काम किए गए। जिन इलाकों में काम करना नियमों के तहत कठिन था, वहां भी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई गई, उनमें से इंदिरा गांधी वार्ड एक है।

कुछ और पार्षद छोड़ सकते पद ?

पार्षद बल्ली सोनी यशभारत से बातचीत में कहते हैं कि इंदिरा गांधी वार्ड के शिवाजी नगर इलाके में 18 गलियां हैं। यहां विकास के काम ठप पड़े हुए हैं। पहले के नगर निगम आयुक्त ने भ्रमण के दौरान कहा था कि क्षेत्र के लोग अगर 40 फीसद विकास शुल्क भी जमा कर दे तो विकास कार्य कराए जा सकते हैं। पार्षद कहते हैं कि इसके बावजूद क्षेत्र में काम रुके हुए हैं। जनता उनसे कहती है। सवाल यही है कि क्या शासन ने काम रोके हैं या नगर निगम का मौजूदा प्रशासन अड़ंगा डाल रहा है। जब जनता नाराज है तो वे पद पर बने रहकर क्या करेंगे। सूत्र बताते हैं कि बल्ली सोनी के बाद कुछ और पार्षद नगर सत्ता पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर सकते है। हो सकता है आने वाले दिनों में कुछ और भाजपा पार्षद इस्तीफे की पेशकश कर दे, लेकिन अगले चुनाव में टिकट के भरोसे के बाद ही।

नाराजगी इसलिए बढ़ी…

दरअसल नगर निगम परिषद की बैठक में आज का दृश्य शुरुआत से ही अलग था, जैसे पार्षद तय करके ही आए थे कि बैठक का एजेंडा अपनी जगह, लेकिन बवाल तो दूसरे मामलों में होकर रहेगा। भाजपा के कुछ पार्षदों ने विकास कार्यों में लापरवाही को लेकर नगर निगम अधिकारियों खासकर आयुक्त से जवाब मांगा। अधिकारी इसके लिए तैयार नहीं थे। निगम अध्यक्ष ने जब आयुक्त की ओर इशारा किया कि आप सदन को बताएं तो आयुक्त तपस्या परिहार का कहना था कि नियमानुसार जवाब देने का काम एमआईसी मेंबर और महापौर का है। पार्षदों में इसको लेकर असंतोष बढ़ा और नौबत पार्षद बल्ली सोनी के इस्तीफे तक पहुंच गई। वे आज की बैठक में इस्तीफा अपने साथ लाए थे, या उन्होंने वहीं लिखा, यह बात अब कोई मायने नहीं रखती। बैठक में महापौर में कुछ पार्षदों के सवालों के जवाब दिए भी। कुल मिलाकर नगर सरकार में चल रही महाभारत का अगला प्रसंग क्या होगा, इसका इंतजार कटनी शहर की जनता को है।IMG 20261014 WA1027

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