नगर निगम परिषद की बैठक के बीच पार्षद के इस्तीफे से हड़कंप, वार्ड के विकास में अनदेखी का आरोप, मेयर ने कहा – आरोप गलत, सभी वार्डों में हुए काम, भाजपा पार्षद सदन की बैठक के बहिष्कार की तैयारी में, सवाल यह भी – इस्तीफा कलेक्टर को क्यों नहीं दिया ?

कटनी, यशभारत। नगर निगम परिषद के सम्मेलन के बीच अब से कुछ देर पहले उस समय हड़कंप मच गया जब इंदिरा गांधी वार्ड के पार्षद ओमप्रकाश सोनी बल्ली ने विकास कार्यों में उपेक्षा और लापरवाही का आरोप लगाते हुए नगर निगम अध्यक्ष के सामने लिखित रूप से इस्तीफे की पेशकश कर दी। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक पार्षद बल्ली सोनी को पद न छोड़ने के लिए राजी करने की कोशिश शुरू हो चुकी थी। परिषद की बैठक में मौजूद विधायक संदीप जायसवाल उन्हें समझा बुझाकर इस्तीफा वापस लेने के प्रयास कर रहे थे। इस बीच परिषद के सम्मेलन में पार्षद के इस कदम को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा जा रहा है कि अगर उन्हें पद छोड़ना ही है तो अपना इस्तीफा कलेक्टर के माध्यम से संभागायुक्त को भेजना चाहिए था। बल्ली सोनी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने ई मेल के जरिए इस्तीफा कलेक्टर को भेज दिया है।
परिषद की बैठक में अचानक से हुए इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद साथी पार्षदों में हलचल तेज हो गई। पता चला है कि भाजपा के कुछ पार्षद अपनी ही नगर सत्ता से आक्रोशित होकर बैठक के बहिष्कार की तैयारी कर रहे थे। एक पार्षद ने हमारे संवाददाता को बताया कि कुछ ही देर में भाजपा के कई पार्षद सदन से बाहर निकल सकते हैं, क्योंकि विकास कार्यों में अनदेखी को लेकर आक्रोश ज्यादा है। पार्षद बल्ली सोनी ने अपने त्यागपत्र में उल्लेख किया है कि वार्ड की कॉलोनियों से नागरिकों द्वारा विधिवत विकास शुल्क जमा कराया गया था। तत्कालीन नगर निगम आयुक्त के कार्यकाल में जनहित को ध्यान में रखते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत वार्ड में सड़क, नाली और अन्य मूलभूत निर्माण कार्यों के लिए करीब 5 करोड़ रुपये की राशि आरक्षित कराई गई थी। इन कार्यों की सक्षम स्वीकृतियां मिलने के साथ ही निविदाएं (टेंडर) भी जारी कर दी गई थीं, जिससे स्थानीय नागरिकों में विकास की उम्मीद जगी थी।
इस्तीफे में दर्द बयां करते हुए पार्षद ने कहा कि प्रशासनिक परिवर्तन के बाद विकास कार्यों को अपेक्षित गति नहीं मिल सकी। स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण कार्य लंबे समय से लंबित पड़े हैं। इसके चलते क्षेत्र की जनता के बीच उन्हें लगातार जवाबदेह होना पड़ रहा है और जनता के भरोसे पर खरा न उतर पाने के कारण वे अत्यधिक व्यथित हैं। बल्ली सोनी ने स्पष्ट किया कि उनका यह कदम किसी व्यक्तिगत द्वेष का परिणाम नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही और उनके अधिकारों के प्रति नैतिक प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए चुना था, लेकिन जब वे नागरिकों को उनका वाजिब हक दिलाने में असमर्थ हैं, तो पद पर बने रहने का नैतिक औचित्य समाप्त हो जाता है।पार्षद ने निगम प्रशासन और परिषद से मांग की है कि वार्ड में लंबित निर्माण कार्यों एवं फाइलों की तत्काल समीक्षा की जाए और टेंडर व क्रियान्वयन पर समयबद्ध निर्णय लिया जाए, ताकि जनता को मूलभूत सुविधाओं के लिए और भटकना न पड़े।
वार्ड में 3 करोड़ से ज्यादा के काम हुए : महापौर
पार्षद की नाराजगी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए महापौर प्रीति सूरी का कहना है कि इनका आरोप गलत है। इंदिरा गांधी वार्ड में 3 करोड़ से ज्यादा के काम कराए गए है। वार्ड में कुछ इलाका अवैध कालोनी में आता हैं। अनेक स्थानों पर नागरिकों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कार्य कराए गए हैं। अवैध कालोनी से निगम को विकास शुल्क भी उतना नहीं मिलता। महापौर ने कहा कि वार्ड की उपेक्षा का आरोप केवल राजनीति से प्रेरित है। शहर के सभी वार्डों में समान रूप से विकास के काम हो रहे हैं।








