मध्य प्रदेशराज्य

जलवायु परिवर्तन में मानव के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव : एडवायजरी जारी

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मंडलाl    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने जलवायु परिवर्तन में मानव के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव तथा मौसमी बीमारियों बचने, अपना एवं अपने परिवार का बचाव करने के लिए एडवायजरी जारी की है। माह मार्च से जुलाई तक तापमान में बढ़ोत्तरी परिलक्षित होती है। तापघात से निपटने के लिए भारत सरकार की गाइड लाईन अनुसार जिला अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रबंधन किया गया है। 

 नशीले पदार्थ जैसे- शराब, उच्च प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ तथा कार्बाेनेटेड शीतल पेय के सेवन से बचे। गर्म हवाओं की स्थिति जानने के लिए रेडियो, टीबी या मौसम के पूर्वानुमान की जानकारी लेते रहें। हल्की ढ़ीली-ढ़ाली सूती वस्त्र पहनें तथा धूप में चश्मा, छाता, टोपी एवं जूता पहनें, चक्कर आने, मितली आने या घबराहट होने पर आराम करें तथा शीतल पेयजल, उपलब्ध हो तो फल का रस, लस्सी, मट्ठा आदि का सेवन करें, उल्टी, सिरदर्द, तेज बुखार की दशा में निकट के अस्पताल अथवा स्वास्थ्य केन्द्र में जरूरी सलाह लें। यात्रा के समय पानी अवश्य रखें, गर्मी के दिनों में ओआरएस को घोल, नीबू पानी, कच्चे आम का रस एवं छाछ का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें।

 पानी पीते रहें, फलों के रस में थोड़ा सा नमक मिलाकर पीयें, उच्च जल सामग्री वाले मौसमी फल और सब्जियां खायें जैसे- तरबीज, खरबूजा, संतरा, अंगूर, अनानास, ककड़ी, खीरा और सलाद पत्ता। दिन के दौरान खिड़कियां और पर्दे बंद रखें, खासकर घर के धूप वाले हिस्से में। रात में हवा आने के लिए खिड़की एवं पर्दे खोलकर रखें। यदि बाहर जाना हो, तो अपनी बाहरी गतिविधियों को दिन के ठंडे समय सुबह और शाम तक सीमित रखें। 

 गर्मी से संबंधित बीमारियों का खतरा शिशु और छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, शारीरिक रूप से बीमार व्यक्ति, विशेष रूप से हृदय रोग या उच्च रक्तचाप वाले, बाहर काम करने वाले, मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति एवं बुर्जुग व्यक्ति को रहता है।

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