गिरफ्तारी वारंट निरस्त, हाईकोर्ट में एफआईआर पर सुनवाई, न्यायालय ने एसआईटी के इंसपेक्टर को जारी किया नोटिस, निलंबित सीएसपी को मिलेगी राहत या नहीं, फैसला आज

कटनी, यशभारत। जमीन सौदेबाजी मामले में कुठला थाने में दर्ज मामले को लेकर फरार चल रहीं निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया एवं अन्य दो आरोपियों क्षितिजराज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी की गिरफ्तारी के लिए जारी किए गए वारंट को न्यायालय ने निरस्त कर दिया है। विदित हो कि न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनीषा जैन तिवारी की अदालत ने 18 सितंबर को तीनों आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। इसके बाद सोमवार को हुई कार्यवाही में अदालत ने इन वारंटों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए वापस किए जाने के निर्देश दिए। अदालत के आदेश में सामने आया कि इसी मामले में एसआईटी जबलपुर की ओर से गिरफ्तारी वारंट के लिए 1 सितंबर को सत्र न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसे 2 सितंबर को निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद फरियादी पक्ष की ओर से भी वारंट जारी करने का आवेदन दिया गया, जिसे 16 सितंबर को निरस्त किया गया था। अदालत के अनुसारए इन पूर्व कार्यवाहियों का उल्लेख किए बिना एसआईटी जबलपुर के निरीक्षक की ओर से निचली अदालत में वारंट जारी करने का आवेदन प्रस्तुत किया गया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पूर्व में सत्र न्यायालय द्वारा आवेदन निरस्त किए जाने के बाद वारंट जारी करने के संबंध में इस अदालत के अधिकार क्षेत्र का प्रश्न उत्पन्न होता था। इसी आधार पर 18 सितंबर को जारी वारंटों को निरस्त कर तत्काल वापस करने का निर्देश दिया गया।
एसआईटी के निरीक्षक को कारण बताओ नोटिस
अदालत ने एसआईटी जबलपुर के निरीक्षक चन्द्रकांत झा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में यह पूछा गया है कि पूर्व की न्यायालयीन कार्यवाही और आवेदन निरस्त होने के तथ्यों से अदालत को अवगत नहीं कराने के संबंध में उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अधिकारियों तथा उच्च न्यायालय को सूचना क्यों न दी जाए। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को आदेश की सूचना देने के निर्देश भी दिए हैं। वारंट की वापसी और आगे की कार्रवाई के लिए प्रकरण की पत्रावली 25 सितंबर को प्रस्तुत की जाएगी।
हाईकोर्ट में आज हो रही सुनवाई
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया की एफआईआर निरस्त करने और अंतरिम राहत की मांग वाली याचिका पर आज सुनवाई हो रही है। मामले को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित मामलों की उपयुक्त पीठ के समक्ष भेज दिया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे और अधिवक्ता प्रियंक अग्रवाल ने पक्ष रखा। याचिकाकर्ता ने कहा कि एफआईआर में उनके विरुद्ध प्रत्यक्ष अपराध का पर्याप्त आधार नहीं है और उन्हें गलत तरीके से मामले में आरोपी बनाया गया है। दूसरी ओर राज्य सरकार ने याचिका और अंतरिम राहत का विरोध किया है।







