मध्य प्रदेशराज्य

कटरा जैन मंदिर से डोली पर निकली अंतिम यात्रा, नम आंखों से दी विदाई

 

रीवा । सडक हादसे में असमय समाधिस्थ हुई आर्यका 105 श्रुतमति माताजी एवं उपशममति माताजी की अंतिम यात्रा में जैन समाज के लोगों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए ।कटरा जैन मंदिर से माताजी की देह को भव्य डोली में विराजमान कर जब अंतिम यात्रा शुरू की गई, तो पूरा माहौल अत्यंत वैराग्यपूर्ण और गमगीन हो गया। उनके अंतिम दर्शनों के लिए हर किसी की आंखें नम थीं। इस घटना की जानकारी मिलने पर सागर ने उनके परिजन भी यहां पहुंच गए थे।

कटरा जैन मंदिर से पहले श्रुतमति माताजी की डोली निकली। इसके कुछ ही देर बाद जानकारी मिली कि संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में उपचार के दौरान उपशममति माताजी भी शांत हो गई हैं। इसके बाद उनकी डोली भी तैयार की गई। शाम को उनकी भी अंतिम यात्रा निकली।

जयकारों से गूंजा मार्ग

अंतिम यात्रा के मार्ग पर आचार्य विद्यासागर महाराज की जय और आर्यका श्रुतमति माताजी अमर रहें.. के गगनभेदी जयकारे गूंजते रहे। अंतिम यात्रा के दौरान जगह-जगह पुष्पवर्षा कर उन्हें श्रद्धालुओं ने नमन करते हुए नम आंखों से विदाई दी।

अर्पित किए नारियल

जैसे ही डोली यात्रा विक्रम पुल के समीप निर्धारित स्थल पर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के पहुंची, समाज के सैकड़ों प्रबुद्ध जनों ने कतारबद्ध होकर माताजी के डोली के सम्मुख श्रद्धापूर्वक नारियल अर्पित किए और उनके संयमी जीवन को नमन किया। जैन परंपरा में साधु-संतों के प्रति सर्वोच्च सम्मान और वैराग्य भाव प्रकट करने के लिए नारियल अर्पित करने की विशेष परंपरा है।

जानकारी के अनुसार इस बार ग्रीष्मकालीन प्रवास में यहां सात माताजी ठहरी थी। जिनमें से हाल ही में 3 ब्यौहारी के लिए प्रस्थान कर गई थी इसे तरह वर्तमान में 4 माताजी यहां प्रवास पर रहीं। जिनमें से बुधवार की सुबह शौच क्रिया के लिए 3 गई थीं और यह दर्दनाक हादसा हो गया।

डिप्टी सीएम को दी जानकारी

दिगंबर जैन समाज कल्याण समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ समाजसेवी अतुल जैन ने इस घटना की जानकारी उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला को दी। इसके बाद जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन का पूरा अमला अस्पताल पहुंच गया। अस्पताल में चिकित्सक जान बचाने के लिए जुट गए, हालांकि वे सफल नहीं हो पाए।

साध्वियों का ऐसा रहा जीवन…

मानव शास्त्र और संस्कृत विषय से उच्च शिक्षित
आर्यिका श्रुतमति माता के बारे में जानकारी सामने आई है कि वे सागर के रामपुरा वार्ड की मूल निवासी थीं। उन्होंने 29 मई 1998 को भाग्योदय तीर्थ सागर में आचार्य विद्यासागर महाराज से आजीवन बम्हचर्य का व्रत लिया था। उन्होंने मानव शास्त्र से एमएससी और संस्कृत से एमए किया था। इनके बड़े भाई आचार्य संघ में मुनि श्री अचलसागर महाराज हैं और वर्तमान में तारादेही जिला दमोह में विराजमान हैं।

अस्पताल घटना की सूचना मिलते ही जैन समाज के लोग
और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी अस्पताल पहुंचे। कमिश्नर बीएम जामोद, कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, एसपी गुरुकरण सिंह, एडिशनल एसपी आरती सिंह, एसडीएम डॉ. अनुराग तिवारी, सीएसपी डॉ. रितु उपाध्याय आदि मौके पर पहुंच गए।

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