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29 साल बाद भी नहीं भूले लोग वह खौफनाक मंज़र,22 मई 1997: जब भूकंप से कांप उठा था जबलपुर

भूकंप का केंद्र जबलपुर के बरेला क्षेत्र स्थित कोसमघाट के पास था

जबलपुर,यशभारत। 22 मई 1997 की वह भयावह सुबह आज भी जबलपुरवासियों के जेहन में ताजा है। ठीक सुबह 4 बजकर 21 मिनट 31 सेकेंड पर आए विनाशकारी भूकंप ने पूरे शहर और आसपास के इलाकों को दहला दिया था। लोग गहरी नींद में थे, तभी अचानक धरती जोर-जोर से कांपने लगी। कुछ ही पलों में चीख-पुकार, अफरा-तफरी और तबाही का मंजर हर तरफ दिखाई देने लगा।

रिक्टर स्केल पर 5.8 तीव्रता वाले इस भूकंप का केंद्र जबलपुर के बरेला क्षेत्र स्थित कोसमघाट के पास था। भूकंप इतना तेज था कि सैकड़ों मकान पलभर में जमींदोज हो गए और हजारों घरों में दरारें पड़ गईं। इस भीषण आपदा में 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जबकि करीब 1500 लोग घायल हुए थे। वहीं लगभग 30 हजार लोग बेघर हो गए थे। सरकारी और निजी संपत्तियों को मिलाकर करीब 600 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ था।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार जबलपुर, मंडला, सिवनी और छिंदवाड़ा सहित 887 गांव इस आपदा से प्रभावित हुए थे। करीब 8500 मकान पूरी तरह ढह गए थे, जबकि 52 हजार से अधिक मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए थे। ग्रामीण इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब थे, जहां कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए थे। भूवैज्ञानिकों के अनुसार यह भूकंप नर्मदा फॉल्ट लाइन में हलचल का परिणाम था। विशेषज्ञों का मानना है कि नर्मदा घाटी क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है, इसलिए यहां भविष्य में भी सतर्कता की आवश्यकता बनी हुई है।

भूकंप के बाद प्रशासन और सेना ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए थे। प्रभावित परिवारों को अस्थायी राहत शिविरों में ठहराया गया तथा घरों के पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक सहायता और निर्माण सामग्री उपलब्ध कराई गई थी। उस समय भीषण गर्मी को देखते हुए लोगों को कच्चा राशन वितरित किया गया था। 29 वर्ष बाद भी जबलपुर के लोग उस दर्दनाक सुबह को याद कर सिहर उठते हैं। यह घटना शहर के इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में आज भी दर्ज है।

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