आशियाना बनाना हुआ महंगा, निर्माण सामग्री के दामों में उछाल, रेत, सरिया और लोहा की कीमतें आसमान छू रहीं, ईरान-इजरायल युद्ध का बताया जा रहा असर

कटनी, यशभारत। इजराइल और ईरान के बीच रहे युद्ध का असर अब देखने को मिल रहा है। इसकी वजह से जहां रसोई गैस की किल्लत हो गई तो वहीं अब सामग्री के दामों में भी इजाफा हो गया है। देश के कई हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की शॉटेज के चलते ट्रांसपोर्टेशन पर असर पड़ा है, जिसकी वजह से निर्माण सामग्री के दामों में बढ़ोत्तरी हो गई। एक जानकारी में बताया गया है कि पिछले एक महीने में निर्माण सामग्री के दमों में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। सीमेंट, रेत, लोहा, कांच, रंग पेंट्स, दरवाजे एवं खिडक़ी में लगने वाले एल्युमीनियम की कीमतों में इजाफा हो गया है, जिससे मध्यम और निम्न वर्ग के लोगो ंको कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। निर्माण सामग्री महंगी होने का सबसे ज्यादा असर प्रधानमंत्री आवास योजना पर पड़ रहा है। शहरी एवं ग्रामीण व क्षेत्रों में पीएम आवासों का निर्माण कार्य चल रहा है। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 1.20 लाख रुपए और शहरी क्षेत्रों में 2.50 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाती है लेकिन सामग्री के दाम बढऩ़े से निर्धारित बजट में मकान बनाना हितग्राहियों के लिए चुनौती बन गया है। लगातार बढ़ती कीमतों के कारण कई परिवारों का बजट हाथ से बाहर हो चुका है।
सरिया की कीमतों में तेजी
व्यापारियों के अनुसार निर्माण सामग्री के दामों में आए अचानक उछाल ने मकान बनवा रहे लोगों की नींद उड़ा दी है। पिछले चार महीने में सरिया की कीमतों में एक हजार रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी हो गई है। वहीं सीमेंट भी 300 रुपए से 350 रूपए प्रति बैग बिक रहा है। बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में सीमेंट के दामों में 20 रुपए प्रति बैग की और तेजी आ सकती है। ऐसे में अपना घर बनाने का सपना देख रहे लोगों का बजट गड़बड़ा गया है। सबसे ज्यादा चिंता प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को सता रही है। मकान बना रहे लोगों व व्यापारियों के अनुसार पिछले एक माह से निर्माण सामग्री के दामों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। सरिया की कीमतों में एक हजार रुपए प्रति क्ंिवटल का इजाफा हुआ है। इस बढ़ोत्तरी ने निर्माण कार्यों की लागत बढ़ा दी है।
थमी निर्माण कार्यों की रफ्तार
शहर सहित आसपास के बड़े कस्बों में भी महंगाई का असर साफ देखा जा रहा है। नए प्रोजेक्ट और अन्य सरकारी निर्माण कार्यों की लागत भी बढ़ गई है। अपना घर बना रहे लोगों का कहना है कि पहले ही मजदूरी और परिवहन खर्च बढ़ चुके थे। अब सामग्री महंगी होने से कई लोगों को निर्माण कार्य बीच में रोकना पड़ रहा है या कर्ज लेकर काम आगे बढ़ाना पड़ रहा है।
दिसम्बर से ही बढ़ रही कीमतें
कृष्णा आयरन टे्रडर्स के संचालक कृष्ण कुमार खंडेलवाल ने बताया कि पिछले चार महीने से लोहा के दामों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। सरिया की कीमतें में 4 रूपए से 6 रूपए प्रति किलो तक बढ़ गई है। दिसम्बर में अम्बा शक्ति 5000 रूपए प्रति क्विंटल था तो वहीं अब बढक़र 6200 रूपए प्रति क्विंटल हो गया है।
इस तरह पड़ रहा असर
ईरान इजरायल युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण घर बनाना 30 से 35 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन टूटने से सरिया, सीमेंट रेत, मार्बल, और पीवीसी पाइपों के दाम आसमान छू रहे हैं। माल ढुलाई महंगी होने से सरिया और सीमेंट के दाम बढ़ गए हैं। निर्माण सामग्री के दाम बढऩे से शहर में कई जगहों पर लोगों ने मकान का काम बीच में ही रोक दिया है।
इस तरह से समझें बढ़ी हुई महंगाई
डेढ़ हजार वर्ग फीट का मकान बनाने में एक माह पहले तक औसत एक हजार रुपए प्रति वर्ग फीट के हिसाब से लागत आती थी। इस आधार पर मकान करीब 15 लाख रुपए में बनता था। इस साइज के मकान में 600 बोरी सीमेंट और करीब 40 क्विंटल सरिया लगता है। दाम बढऩे पर सीमेंट का खर्च 1 लाख 37 हजार 500 रुपए से बढक़र 1 लाख 54 हजार रुपए हो गये है।







