कटनीमध्य प्रदेश

अस्पताल में रौंदे जा रहे स्वच्छता मानक, भोजन की मात्रा कम, थाली से गायब फल, सलाद और पौष्टिक दूध, मरीजों एवं गर्भवती महिलाओं को थाली की जगह बाल्टी में दिया जा रहा भोजन, तीन नोटिस के बाद भी ठेकेदार पर कार्यवाही नहीं कर रहा अस्पताल प्रबंधन

कटनी, यशभारत। जिला चिकित्सालय में भर्ती मरीजों, गर्भवती महिलाओं एवं प्रसूताओं को थाली की जगह बाल्टी में भोजन दिया जा रहा है। सरकार द्वारा तय डाइट चार्ट, मात्रा और स्वच्छता मानकों को खुलेआम रौंदा जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने तीन-तीन नोटिस दिए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्थिति यह है कि थाली में भोजन की मात्रा कम, फल, सलाद और दूध गायब है। सवाल यह है कि क्या जिला चिकित्सालय में मरीजों को स्वस्थ करने के बजाय बीमार बनाने का काम हो रहा है। इंदौर जैसी घटनाओं के बाद भी यदि प्रशासन नहीं जागा, तो किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा।
ऐसा लग रहा है कि जिला चिकित्सालय अब मरीजों के लिए बीमारी का केंद्र बनता जा रहा है। भर्ती मरीजों, गर्भवती महिलाओं एवं प्रसूताओं को दिया जाने वाला भोजन न केवल शासन द्वारा निर्धारित मानकों के विपरीत है, बल्कि सीधे तौर पर उन्हें कुपोषण, संक्रमण और गंभीर बीमारियों की ओर धकेलने वाला साबित हो रहा है। ताजा मामला जिला चिकित्सालय का है, जहां मरीजों को थाली में नहीं बल्कि बाल्टी में भरकर भोजन वार्डों में पहुंचाया जा रहा है। यह दृश्य न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या अस्पताल प्रबंधन ने स्वच्छता, गरिमा और मानवाधिकारों से पूरी तरह हाथ खींच लिया है।
भोजन नहीं, बीमारी को न्योता
इस पूरे मामले को लेकर अधिवक्ता राज दुबे ने जिला प्रशासन से भी शिकायत की है। शिकायत के अनुसार अस्पताल में रोटी, दाल, सब्जी, लड्डू, दूध आदि की निर्धारित मात्रा वजन जान बूझकर कम दी जा रही है। डाइट चार्ट में शामिल फल और सलाद गायब हैं। दूध, चाय और नाश्ते के समय व मात्रा में भारी अनियमितता है। जिन मरीजों के पास बर्तन नहीं होते। उन्हें भोजन तक नहीं दिया जाता। जानकारों का मानना है कि इस प्रकार का कुपोषण और अस्वच्छ भोजन गंभीर संक्रमण, फूड पॉइजनिंग, एनीमिया और रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट का कारण बन सकता है, जो पहले से बीमार मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
लगातार नोटिस के बाद कार्रवाई नहीं
चौंकाने वाली बात यह है कि इस गंभीर लापरवाही के बावजूद भोजन ठेकेदार को 14 जुलाई 2025, 12 अगस्त 2025 और 18 अगस्त 2025 को तीन बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद न ठेका निरस्त हुआ, न ही आर्थिक दंड लगा। न व्यवस्था में सुधार हुआ। यह स्थिति अब केवल ठेकेदार की लापरवाही नहीं, बल्कि अस्पताल प्रबंधन की मौन स्वीकृति और संदिग्ध भूमिका की ओर भी स्पष्ट संकेत करती है।
आरटीआई में पर्दा डालने की कोशिश
अधिवक्ता राज दुबे ने बताया कि इस पूरे मामले में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी भी आज तक उपलब्ध नहीं कराई गई। जबकि सिविल सर्जन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके थे। यह सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है और यह संदेह और गहरा करता है कि कहीं भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को जान बूझकर छुपाया तो नहीं जा रहा।
इंदौर की मौतों से भी नहीं चेता प्रशासन
हाल ही में इंदौर में दूषित पानी और खाद्य व्यवस्था के कारण हुई मौतों के बाद भी यदि जिला चिकित्सालय कटनी की यह स्थिति बनी हुई है, तो यह प्रशासनिक संवेदनहीनता का गंभीर उदाहरण है। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो किसी बड़ी और अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग
इस पूरे प्रकरण को लेकर जनसुनवाई में जिला प्रशासन से मांग की गई है कि बिना पूर्व सूचना आकस्मिक निरीक्षण कराया जाए। भोजन की मात्रा, गुणवत्ता और स्वच्छता की स्वतंत्र जांच हो। दोषी ठेकेदार पर कठोर कार्रवाई एवं एफआईआर दर्ज हो। नोटिस के बावजूद चुप रहने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। यह केवल एक शिकायत नहींए बल्कि संभावित जनहानि की चेतावनी है। अब यदि अस्पताल में भोजन से जुड़ी कोई गंभीर घटना होती हैए तो उसकी जिम्मेदारी केवल ठेकेदार की नहीं, बल्कि मौन साधे बैठे अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन की भी होगी।

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