चिकित्सा और तकनीक का बेजोड़ संगम: कार्डियोलॉजिस्ट ने बनाया ‘कैथ लैब इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर’

रीवा। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय रीवा के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ वीडी त्रिपाठी ने कैथ लैब में उपयोग होने वाले उपकरणों एवं उपभोग्य सामग्रियों के बेहतर प्रबंधन के लिए कैथ लैब इनवेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया है।
यह सॉफ्टवेयर कैथ लैब में उपयोग होने वाले स्टेंट, बैलून, गाइडवायर, कैथेटर तथा अन्य आवश्यक सामग्री का डिजिटल रिकॉर्ड रखने, स्टॉक की निगरानी करने, समय पर मांग तैयार करने तथा सामग्री की अनावश्यक कमी और अपव्यय को कम करने में सहायक होगा। विभाग के कार्डियोलॉजिस्ट और कैथ लैब टेक्नोलॉजिस्ट से इसके परीक्षण एवं सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।
कार्डियोलॉजिस्ट होने के साथ-साथ डॉ वीडी त्रिपाठी तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भी विशेष रुचि रखते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक आधुनिक एवं प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल समाधान विकसित कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने भारतीय स्थानीय खानपान पर आधारित भारतप्लेट डाट एआई की अवधारणा विकसित की है। जिसका उद्देश्य स्थानीय भोजन की आदतों के आधार पर लोगों को वैज्ञानिक, संतुलित एवं हृदय-स्वस्थ आहार संबंधी मार्गदर्शन प्रदान करना है। इसके अलावा उनकी एक किताब भी प्रकाशित हो चुकी है। दिल के मरीजों के लिए यह किबात उन्होंने लिखी और प्रकाशित भी कराई। इस किताब से समय रहते लोग दिल की बीमारियों का पता लगा सकते हैं और बच भी सकते हैं।
डॉ त्रिपाठी का कहना है कि उनका उद्देश्य चिकित्सा, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जोड़कर ऐसे व्यावहारिक समाधान विकसित करना है, जो अस्पतालों, चिकित्सकों और आम जनता, सभी के लिए उपयोगी सिद्ध हों। डॉ वी डी त्रिपाठी सिर्फ अस्पताल में मरीजों को इलाज और आपरेशन कर ही नहीं स्वस्थ्य करते। वह कोई न कोई ऐसा काम भी करते रहते हैं, जिससे लोग प्रेरित होकर उनका अनुशरण भी कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में दिल को स्वस्थ्य रखने के लिए खुद 100 किमी चलने का चैलेंज रखा। उसे पूरा करने में भी जुट गए हैं। उनका कहना है कि वह सभी को तो वॉक करने की सलाह देते हैं लेकिन खुद अमल नहीं कर रहे थे। इसी वजह से उन्होंने इसकी शुरुआत की। ऐसे कई काम है, जो डॉ वीडी त्रिपाठी ने अमल में लाया, जो धीरे धीरे मिशाल बन रहा है। वह मरीजों को सिर्फ दवाइयों से ही ठीक नहीं करते, बीमारी को आने के पहले रोकने के लिए भी तैयार करते हैं। उनके इलाज का यही तरीका औरों से उन्हें अलग बनाता है।







