अनुबंध के विपरीत 39.60 क रोड़ का भुगतान, नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) ने रिपोर्ट में किया खुलासा, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत, स्लीमनाबाद में बरगी नहर निर्माण का मामला

कटनी, यशभारत। स्लीमनाबाद तहसील में बनाई जा रही बरगी नहर में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक कैग ने अपनी रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है, जिसमे कहा गया है कि नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) के अफसरों ने टनल निर्माण के दौरान अप्रत्याशित घटना होने की आशंका को लेकर ठेकेदार पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड को अनुबंध के प्रावधानों के विरूद्ध 39.60 करोड़ रुपए कर भुगतान कर दिया। कैग की रिपोर्ट सामने आने के बाद शासन स्तर पर हडक़म्प मच गया है। ऐसा माना जा रहा है कि अब राज्य सरकार इस मामले की जांच कराकर दोषी अफसरों पर कार्रवाई कर सकती है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि स्लीमनाबाद में बरगी नहर का काम वर्ष 2008 से शुरू हुआ था, जो अब तक पूरा नहीं हो पाया है। इस बीच कुछ दिन पहले यह खबर सामने आई थी कि अपै्रल तक बरगी नहर का काम पूरा हो जाएगा। इस सबके बीच सामने आई नियंत्रक महालेखा परीक्षक कैग की रिपोर्ट ने नहर के निर्माण में की गई अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। गौरतलब है कि बरगी डायवर्जन प्रोजेक्ट के तहत नर्मदा नदी पर बरगी में स्थित बांध के पानी को मोडऩे के लिए यह टनल बनाई जा रही है। इस प्रोजेक्ट में कटनी जिले की स्लीमनाबाद तहसील के पास 10 मीटर व्यास वाली 12 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण शामिल है। इस पूरे मामले में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण एनवीडीए के अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत सामने आई है।
डीपीआर में खुदाई और बोरिंग स्थल का जल स्तर ऊंचा
भू-वैज्ञानिक जांच की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट डीपीआर में खुदाई और बोरिंग स्थल का जल स्तर बहुत ऊंचा था, इसलिए जल निकासी को कार्यक्षेत्र में शामिल किया गया। इसे पटेल इंजीनियरिंग को ही करना था लेकिन टनल की खुदाई के समय, टनल बोरिंग मशीन टीबीएम का उपयोग करते हुए हुए उच्चदाब के साथ आने वाले पानी की निकासी ठेकेदार पटेल इंजीनियरिंग को अपने संसाधनों से सुरंग से करनी पड़ी। टनल निर्माण के दौरान किए गए अनुबंध की शर्तों के अनुसार सक्षम प्राधिकारी अप्रत्याशित घटना की परिस्थितियों में अतिरिक्त समय की अनुमति दे सकेगा। हालांकि अप्रत्याशित घटना के कारण ठेकेदार को हुए किसी भी नुकसान के लिए कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा। अनुबंध में यह भी प्रावधान है कि अप्रत्याशित घटना की परिभाषा नियोक्ता और ठेकेदार के नियंत्रण से परे एक ऐसी घटना है, जो किसी पक्ष के लिए कार्य करना असंभव या अवैध बना देती है।
अप्रत्याशित परिस्थितियों में ठेकेदार को करना था काम
कैग ने जांच में पाया कि एनवीडीए की 257वीं बैठक में चीफ इंजीनियर जबलपुर द्वारा प्रस्तुत तथ्यों को संज्ञान में लिया गया, जिसमें अत्यधिक जल निकासी से उत्पन्न स्थिति और उसके लिए अप्रत्याशित घटना के अंतर्गत किए जाने वाले भुगतान के बारे में बताया गया था। चीफ इंजीनियर ने अप्रत्याशित घटना के अंतर्गत अनुबंध की शर्तों के विपरीत फरवरी 2023 में 20.81 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान करने की मंजूरी दे दी। एनवीडीए ने जल निकासी के लिए 338वें आरए बिल तक 39.60 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान भी कर दिया, जो कि अनुबंध के प्रावधानों के विरूद्ध किया गया है। एनआईटी की शतों में केवल अप्रत्याशित परिस्थितियों में अतिरिक्त समय की अनुमति दी गई थी। इसके अलावा टनल निर्माण के दौरान जल निकासी का काम ठेकेदार को ही करना था, इसका अलग से भुगतान करने का अनुबंध में प्रावधान नहीं है। कैग के जांच दल ने एनवीडी के सदस्य वित्त ने पूछा तो अधिकारियों ने फरवरी 2025 में बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद टेंडर के लिए कार्यक्षेत्र निर्धारित कर भुगतान को टेंडर में शामिल किया गया।







