जबलपुरमध्य प्रदेश

युवाओं की लड़ाई गायब, मुद्दे अनाथ: युवा मोर्चा और युवा कांग्रेस का दोहरा फेल्योर उजागर

जबलपुर। शहर के युवाओं से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि युवा मोर्चा और युवा कांग्रेस आखिर कर क्या रहे हैं? बेरोजगारी, सरकारी भर्तियों का ठप होना, प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी, पेपर लीक, बढ़ता नशा, खेल और शिक्षा सुविधाओं की बदहाली, स्टूडेंट्स की आर्थिक समस्याएं—इन तमाम मुद्दों पर जहां सशक्त और आक्रामक नेतृत्व की जरूरत थी, वहीं सत्ता पक्ष का युवा मोर्चा और विपक्ष की युवा कांग्रेस दोनों ही पूरी तरह मौन और निष्क्रिय नजर आ रहे हैं।

युवाओं के मुख्य मुद्दे, जिन पर दोनों संगठनों की चुप्पी सवाल बन गई

शहर के युवा जिन समस्याओं से रोज जूझ रहे हैं, उन पर युवा संगठनों की भूमिका लगभग शून्य है—
बेरोजगारी: सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर घटते जा रहे हैं, लेकिन न तो रोजगार मेलों को लेकर दबाव है, न नई भर्तियों की मांग को लेकर आंदोलन।

प्रतियोगी परीक्षाओं में अनिश्चितता:

परीक्षाओं की तारीखें टलना, रिजल्ट में देरी और भर्ती प्रक्रियाओं का वर्षों तक लटका रहना युवाओं को मानसिक तनाव में डाल रहा है।

पेपर लीक और परीक्षा घोटाले:

बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों पर युवा मोर्चा और युवा कांग्रेस की ओर से कोई ठोस, लगातार संघर्ष नहीं दिखता।

नशे की बढ़ती लत:

शहर में स्मैक, गांजा और नशीली दवाओं की आसान उपलब्धता युवाओं को बर्बादी की ओर धकेल रही है, लेकिन दोनों संगठनों के पास न कोई अभियान है, न रोडमैप।

खेल और स्टार्टअप सुविधाओं की कमी:

खेल मैदानों की बदहाली, कोचिंग सुविधाओं का अभाव और युवाओं के लिए स्टार्टअप सपोर्ट सिस्टम न के बराबर है।

शिक्षा और फीस का बोझ:

निजी कॉलेजों की मनमानी फीस, हॉस्टल और ट्रांसपोर्ट की महंगाई पर भी युवा संगठनों की चुप्पी अखर रही है।

मुद्दों की राजनीति दफन, इवेंट और फोटो सेशन जिंदा

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि युवा मोर्चा और युवा कांग्रेस की सक्रियता अब मुद्दा आधारित संघर्ष से हटकर प्रतीकात्मक आयोजनों तक सीमित हो गई है।झील सफाई, पौधारोपण, जयंती कार्यक्रम और सोशल मीडिया फोटो—यही आज की “युवा राजनीति” बनती जा रही है।

सोशल मीडिया पर शेर, ज़मीन पर ढेर

फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स पर युवाओं के नाम पर लंबी पोस्ट और वीडियो जरूर दिखते हैं, लेकिन धरातल पर संघर्ष पूरी तरह गायब है।

युवा सवाल कर रहे हैं—क्या हमारी समस्याएं सिर्फ पोस्ट तक सीमित रह जाएंगी?

पदों की राजनीति हावी, युवा नेतृत्व नाकाम-विशेषज्ञों का मानना है कि युवा मोर्चा और युवा कांग्रेस के कई पदाधिकारी युवाओं के मुद्दों से ज्यादा पद, पहचान और भविष्य की राजनीति में उलझे हुए हैं।
संगठन संघर्ष का मंच कम और राजनीतिक सीढ़ी ज्यादा बनते जा रहे हैं।

युवा पूछ रहे हैं—हमारी आवाज कौन बनेगा?

आज शहर का युवा साफ शब्दों में पूछ रहा है—जब बेरोजगारी, परीक्षा, नशा और शिक्षा जैसे मुद्दों पर युवा संगठन खामोश हैं, तो फिर हमारी लड़ाई कौन लड़ेगा?

अब भी नहीं जागे तो भरोसा पूरी तरह टूटेगा

राजनीतिक विश्लेषकों की चेतावनी स्पष्ट है—अगर युवा मोर्चा और युवा कांग्रेस ने जल्द ही युवा मुद्दों पर सड़क से सदन तक संघर्ष शुरू नहीं किया, तो उनकी विश्वसनीयता युवाओं के बीच पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button