
जबलपुर यशभारत। इंदौर में रहकर सिविल जज की तैयारी करने वाली कटनी निवासी अर्चना तिवारी की गुत्थी लगभग सुलझ चुकी है। सूत्रों के मुताबिक अर्चना तिवारी को ग्वालियर जिले के एक गांव से बहुत ही गोपनीय तरीके से निजी वाहन में भोपाल एसआरपी कार्यालय लाया जा रहा है। इस मामले में राजनीतिक भी गर्मा गई थी। विगत 13 दिन से गायब युवती की तलाश करने के लिए पूरे मध्य प्रदेश की पुलिस को काफी पसीना बहाना पड़ा।

इंदौर से बस द्वारा पहुंची ग्वालियर
कटनी निवासी अर्चना तिवारी का कोई रहस्यमय ढंग से गायब होना नहीं था वह अपनी पूर्व योजना के अनुसार ग्वालियर के भवरपुरा थाने में पदस्थ आरक्षक से मिलने के लिए 6 अगस्त को बस से रवाना हुई थी।

फर्जी निकली नर्मदा एक्सप्रेस में सवार होने की खबर
विगत 13 दिनों से कटनी निवासी अर्चना तिवारी नर्मदा एक्सप्रेस में सवार होने के बाद रहस्यमयी तरीके से लापता होने की खबर काफी सुर्खियों में रही। जिसको लेकर जीआरपी आरपीएफ जिला पुलिस एवं खुफिया शाखा की नींद हराम हो गई थी।

घर में फोन करके किया गुमराह
अर्चना तिवारी द्वारा 7 अगस्त को नर्मदा एक्सप्रेस के एसी कोच में सवार होकर कटनी आने की बात परिजनों को फोन पर दी थी। फोन पर भोपाल पहुंचने के लिए सूचना से परिजनों को अवगत कराया था।

परिवार ने दावा किया है कि अर्चना सकुशल है, लेकिन रहस्य ट्रेन का नहीं बस का टिकट कराया था बुक इस संबंध में मामले की छानबीन करने के लिए लगी पुलिस सूत्रों की माने तो अर्चना का टिकट ट्रेन से नहीं बस का टिकट ग्वालियर के एक पुलिस कांस्टेबल ने बुक किया था। जीआरपी को सीडीआर के तहत ग्वालियर की लोकेशन मिली थी। खुलासे के बाद रेलवे पुलिस ने ग्वालियर जिले के भंवरपुरा थाना पहुंचकर कांस्टेबल से पूछताछ शुरू कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या अर्चना के लापता होने और कांस्टेबल का संबंध केवल टिकट बुकिंग तक सीमित है या इसके पीछे कोई और कारण भी है।







