रेल दुर्घटनाओं में अभूतपूर्व कमी: सुरक्षा बजट तीन गुना बढ़ा, कोहरे से बचाव के उपकरण 288 गुना अधिक

रेल दुर्घटनाओं में अभूतपूर्व कमी: सुरक्षा बजट तीन गुना बढ़ा, कोहरे से बचाव के उपकरण 288 गुना अधिक
रेलवे का सुरक्षा मिशन सफल: कोहरे से बचाव के उपकरण 288 गुना बढ़े, कवच सिस्टम से सुरक्षित हुए ट्रैक
भोपाल, यशभारत। भारतीय रेल ने पिछले एक दशक में यात्री सुरक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार दर्ज किए हैं। केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि वार्षिक दुर्घटनाओं का औसत 2004-14 के दौरान 171 था, जो चालू वर्ष 2025-26 में (नवंबर तक) घटकर मात्र 11 रह गया है।
रेल मंत्री ने बताया कि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बजट में भारी वृद्धि की गई है। सुरक्षा संबंधी गतिविधियों पर होने वाला व्यय 2013-14 के ₹39,463 करोड़ से लगभग तीन गुना बढ़कर चालू वित्त वर्ष में ₹1,16,470 करोड़ हो गया है।
तकनीकी उन्नयन से सुरक्षा मजबूत
रेलवे ने मानवीय और तकनीकी विफलताओं को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर तकनीकी उन्नयन किया है। परिणामी ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या 2014-15 में 135 थी, जो 2024-25 में घटकर 31 रह गई। स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली ‘कवच’ को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा मार्ग सहित कुल 15,512 किमी पर कवच का कार्यान्वयन शुरू कर दिया गया है। लोको पायलटों को जीपीएस आधारित कोहरे से सुरक्षा उपकरण (एफएसडी) प्रदान किए गए हैं।
वैष्णव ने बताया कि कोहरे से बचाव के उपकरणों की संख्या 2014 के 90 से बढ़कर 2025 में 25,939 हो गई है, यानी 288 गुना वृद्धि। वही मानव विफलता कम करने के लिए 6,656 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम और 10,098 लेवल क्रॉसिंग गेटों पर इंटरलॉकिंग की व्यवस्था की गई है। सुरक्षित रेल संचालन सुनिश्चित करने के लिए पुराने पारंपरिक आईसीएफ कोचों को एलएचबी डिज़ाइन के कोचों से बदला जा रहा है।
तोड़फोड़/छेड़छाड़ की जांच और रोकथाम
रेलवे ट्रैक से छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे राज्य पुलिस/जीआरपी के साथ मिलकर काम कर रहा है। रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि ट्रैक से छेड़छाड़ जैसे आपराधिक मामलों की जांच करना और कानून व्यवस्था बनाए रखना संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
रोकथाम के लिए प्रमुख कदम:
संवेदनशील क्षेत्रों में आरपीएफ, जीआरपी और सिविल पुलिस द्वारा संयुक्त गश्त। खुफिया जानकारी साझा करने के लिए विशेष दल गठित। रेल ट्रैक के पास रहने वाले लोगों को जागरूक करना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने का अनुरोध। रेलवे राज्य स्तरीय सुरक्षा समिति (एसएलएससीआर) की बैठकों के माध्यम से जीआरपी और आरपीएफ के बीच घनिष्ठ समन्वय स्थापित करना। रेलवे सुरक्षा सुधार के लिए एकीकृत ब्लॉक, रोलिंग ब्लॉक की अवधारणा और कर्मचारियों के नियमित प्रशिक्षण जैसे प्रक्रियात्मक बदलाव भी लागू कर रहा है।







