ड्रामची आर्ट एंड कल्चर फाउंडेशन की पहली प्रस्तुति चोर साहब के दो सफल मंचन , हास्य-व्यंग्य के जरिए सामाजिक विसंगतियों पर चोट, दर्शकों को गुदगुदाने के साथ सोचने पर भी किया मजबूर

ड्रामची आर्ट एंड कल्चर फाउंडेशन की पहली प्रस्तुति चोर साहब के दो सफल मंचन
हास्य-व्यंग्य के जरिए सामाजिक विसंगतियों पर चोट, दर्शकों को गुदगुदाने के साथ सोचने पर भी किया मजबूर
भोपाल, यश भारत। ड्रामची आर्ट एंड कल्चर फाउंडेशन ने अपनी पहली रंगमंचीय प्रस्तुति चोर साहब के दो सफल मंचनों के साथ रंगमंच की दुनिया में कदम रखा। रविंद्र भवन स्थित अंजनी सभागार मे नाटक का हिंदी अनुवाद एवं निर्देशन निधि दीवान ने किया। विश्वविख्यात इतालवी नाटककार दारियो फ़ो की प्रसिद्ध कृति The Virtuous Burglar पर आधारित चोर साहब को हिंदी दर्शकों और भारतीय परिवेश के अनुरूप रूपांतरित किया गया है। रूपांतरण के दौरान मूल रचना की आत्मा व्यंग्यात्मक धार और लेखक की मूल भावभूमि को बरकरार रखने का विशेष ध्यान रखा गया ताकि दारियो फ़ो की लेखनी का मर्म हिंदी दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।हास्य और व्यंग्य से भरपूर यह नाटक रोचक परिस्थितियों के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों, मानवीय स्वभाव और व्यवस्था के विरोधाभासों को सामने लाता है। मनोरंजक घटनाक्रम के जरिए प्रस्तुति दर्शकों को हंसाने के साथ सामाजिक परिस्थितियों पर विचार करने के लिए भी प्रेरित करती है। नाटक के संगीत संयोजन एवं संगीत निर्देशन की जिम्मेदारी उमेश तर्कस्वार ने निभाई जबकि प्रकाश व्यवस्था बालेंद्र सिंह ने संभाली। दोनों मंचनों के साथ फाउंडेशन ने अपनी रचनात्मक रंगमंचीय यात्रा की शुरुआत की। विश्व रंगमंच की एक प्रतिष्ठित कृति को हिंदी दर्शकों तक पहुंचाने का यह प्रयास संस्था की रंगमंच के प्रति प्रतिबद्धता और सार्थक नाट्य प्रस्तुतियां देने के संकल्प को रेखांकित करता है।







