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एसबीएल ब्लास्ट के दो महीने बाद भी दर्द जिंदा,23 की मौत, कई जख्मी, 18 बच्चों के सिर से उठा मां का साया

नागपुर, यशभारत

एसबीएल ब्लास्ट के दो महीने बाद भी दर्द जिंदा,23 की मौत, कई जख्मी, 18 बच्चों के सिर से उठा मां का साया

नागपुर, यशभारत। 1 मार्च, 2026 को एसबीएल एनर्जी लिमिटेड के राऊलगांव प्लांट में हुआ भीषण विस्फोट कुछ ही सेकंड में सब कुछ बदल गया। लेकिन इस हादसे के जख्म आज दो महीने बाद भी ताजा हैं। इस त्रासदी में अब तक 23 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि पांच लोग अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। सबसे दर्दनाक सच यह है कि 18 बच्चे अपनी मां को हमेशा के लिए खो चुके हैं।
नागपुर के अस्पतालों में आज भी कई परिवारों की जिंदगी ठहरी हुई है। ऑरेंज सिटी हॉस्पिटल के गलियारों में परिजन अपने अपनों के ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं। कुछ बच्चे आईसीयू के बाहर बैठकर अपनी मां के होश में आने की आस लगाए हुए हैं।
ऐसी ही एक कहानी दुर्गा घाडगे के परिवार की है, जो अभी भी वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रही हैं। उनकी छोटी बेटियां दिन्येश्वरी और शिवानी अस्पताल के बाहर बैठकर हर पल मां के ठीक होने की उम्मीद कर रही हैं। हालात इतने कठिन हैं कि जन्मदिन जैसे पल भी बिना खुशी के गुजर रहे हैं।
इस हादसे ने कई परिवारों को पूरी तरह तोड़ दिया है। कहीं बुजुर्ग दादा-दादी अपने पोते-पोतियों की जिम्मेदारी उठा रहे हैं, तो कहीं छोटे बच्चे समय से पहले बड़े हो गए हैं।
विस्फोट के बाद सुरक्षा मानकों और लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर इतनी बड़ी घटना कैसे हुई और कौन जिम्मेदार है।
यह हादसा सिर्फ एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि उन परिवारों की जिंदगी में हमेशा के लिए छूट गया गहरा घाव है, जिसे भरने में शायद सालों लग जाएंगे।

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