जेपी अस्पताल सहित राजधानी के अस्पतालों में अब शुरू हुई सुरक्षा कवायद, मॉक ड्रिल और जागरूकता अभियान पर जोर

जेपी अस्पताल सहित राजधानी के अस्पतालों में अब शुरू हुई सुरक्षा कवायद, मॉक ड्रिल और जागरूकता अभियान पर जोर
भोपाल यश भारत । देशभर में अस्पतालों में आग लगने की घटनाओं और मरीजों की मौत के मामलों के बाद राजधानी भोपाल के सरकारी अस्पतालों में अग्निशमन व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन सक्रिय नजर आ रहा है। लंबे समय से सुरक्षा इंतजामों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब जयप्रकाश नारायण अस्पताल सहित राजधानी के अन्य सरकारी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा को लेकर विशेष अभियान चलाने की तैयारी अस्पतालों में कई जगह फायर एग्जिट के सामने सामान रखा मिला, तो कहीं अग्निशामक यंत्रों की नियमित मॉनिटरिंग पर सवाल , मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि बड़े अस्पतालों में हर दिन हजारों लोगों की आवाजाही होती है लेकिन आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी की जानकारी अधिकांश लोगों को नहीं होती। अस्पतालों में पुराने विद्युत उपकरण, ओवरलोड वायरिंग और भीड़भाड़ भी खतरे की बड़ी वजह मानी जा रही है। इन कमियों और आशंकाओं के बीच अब अस्पताल प्रबंधन ने अग्निशमन व्यवस्थाओं को लेकर जागरूकता अभियान शुरू किया है। संदेश के साथ कर्मचारियों, मरीजों और उनके परिजनों को आग से बचाव और आपात स्थिति में अपनाए जाने वाले उपायों की जानकारी दी जा रही है। अस्पताल परिसर में पोस्टर और संदेशों के माध्यम से लोगों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और चार्जरों का उपयोग के बाद प्लग निकालने, ज्वलनशील वस्तुओं को गर्मी के स्रोतों से दूर रखने और परिसर को साफ एवं अव्यवस्था मुक्त रखने की सलाह दी गई। साथ ही फायर एग्जिट, असेंबली प्वाइंट और आपातकालीन निकासी मार्गों की जानकारी भी साझा की गई। जेपी अस्पताल में कर्मचारियों पुल, एम, स्क्वीज और स्वीप तकनीक के जरिए फायर एक्सटिंग्विशर चलाने की प्रक्रिया समझाई गई। कर्मचारियों को यह भी बताया गया कि आग लगने की स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत स्थिति का आकलन करें और जरूरत पड़ने पर फायर ब्रिगेड 101 तथा एम्बुलेंस 102 पर संपर्क करें। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अग्नि सुरक्षा केवल प्रबंधन की नहीं बल्कि हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। किसी भी संभावित खतरे की सूचना तुरंत प्रशासन को देने की अपील की गई है। अस्पतालों में अग्निशमन व्यवस्था केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि नियमित फायर ऑडिट, उपकरणों की जांच और कर्मचारियों के प्रशिक्षण को प्राथमिकता देना जरूरी है। राजधानी के अस्पतालों में शुरू हुई यह कवायद अब सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा मानी जा रही है सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि सेफ्टी वीक के दौरान प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल आयोजित की गईं। जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा कर आवश्यक अभ्यास भी कराए गए। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रबंधन मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।






