हेलिक्टेरेस इसोरा के पौधे से औषधी बनाने पर किया जा रहा शोध

हेलिक्टेरेस इसोरा के पौधे से औषधी बनाने पर किया जा रहा शोध
– शोध में आया सामने पेट की समस्याओं को दूर करने में है सक्षम
आशीष दीक्षित, भोपाल। प्रदेश के जंगलों में पनप रही वनसंपदा में औषधीय पौधों की भरमार है। कई तरह के असाध्य रोगों को दूर करने में औषधीय पौधे सक्षम है। हेलिक्टेरेस इसोरा जिसे मरोड़ फली ऐसी ही एक औषधीय पौधा है। जिसे लेकर अब कई तरह के शोध किए जा रहे हैं। प्रारंभिक शोध में सामने आया है कि हेलिक्टेरेस इसोरा का पौधा पेट दर्द की समस्याओं का दूर करने में कारगार है इतना ही नहीं पेट दर्द, सर्प दंश, शुगर की समस्या को भी दूर कर सकता है। पेंच, सतपुड़ा टाइगर, संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में हेलिक्टेरेस इसोरा के पौधों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण मिल रहा है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने इसोरा को लेकर जानकारी साझा की है। माना जा रहा है कि औषधीय गुण को देखते हुए जल्द ही इसे चिकित्सकीय प्रयोग में लाया जा सकता है।
जानकारों के मुताबिक मरोड़ फली का वानस्पतिक नाम हेलिक्टेरेस इसोरा है। इसे आमतौर पर पूर्वी भारतीय स्कूट्री या भारतीय स्कूट्री के नाम से भी जाना जाता है। यह पौधा एशिया में पाया जाने वाला एक झाड़ी या छोटा पेड़ है और पारंपरिक चिकित्सा में पेट के रोगों के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
इस तरह का रहा है पौधा
हेलिक्टेरेस इसोरा जिसे सतपुड़ा क्षेत्र में मरोड़ फली भी कहा जाता है, एक औषधीय पौधा है जो अपनी असामान्य, मुड़ी हुई फलियों के लिए जाना जाता है। पारंपरिक रूप से विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के लिए उपयोग किया जाता है, जिसमें सर्पदंश के उपचार के लिए इसकी क्षमता का अध्ययन किया गया है। सतपुड़ा पर्वतमाला से इसके नमूने एकत्र किए गए हैं। इसके फाइटोकेमिकल्स का अध्ययन किया गया है, जो पारंपरिक उपयोगों की पुष्टि करता है।
इस तरह से पहचान किया जाता है पौधे को
– हेलिक्टेरेस इसोरा की पहचान मुड़ी हुई फलियों से होती है। जिसकी लंबाई एक से ढाई इंच तक होती है।
– इसके कई अन्य नाम भी हैं, जैसे कि मृग-शिंगा, केवणी, और ईस्ट इंडियन स्क्रूट्री।
– यह एक औषधीय वृक्ष है जिसके तने की छाल और जड़ें गैलेक्टागॉग विरोधी होती हैं।
– पेट दर्द की समस्या को दूर किया जा सकता है
यहां से किए गए नमूने एकत्र
प्राप्त जानकारी के अनुसार सतपुड़ा पर्वतमाला के नंदुरबार और धुले जिलों से हेलिक्टेरेस इसोरा के नमूने एकत्र किए गए हैं। वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि इस पौधे से फाइटोकेमिकल्स नामक रसायन निकलता है। जिसका उपयोग दवा बनाने में किया जाता है।
सांप का विष रोकने की रखता है क्षमता
विशेषज्ञों के मुताबिक हेलिक्टेरेस इसोरा हेलिक्टेरेस इसोरा में नाजा सांप के विष को रोकने की क्षमता होती है। यह क्षमता इसके फॉस्फोलिपेज़ ए 2 निरोधात्मक गतिविधि के कारण होती है। इसके स्वस्थ पौधों से मिट्टी हटाकर, पत्तियों, तनों और फलों को अलग किया जाता है, फिर इन्हें कुचलकर इनसे फाइटोकेमिकल्स का निष्कर्षण किया जाता है।
यहां पाया है हेलिक्टेरेस इसोरा का पौधा
शोधकर्ताओं के मुताबिक भारत के शुष्क पर्णपाती वनों में 1500 मीटर तक की ऊँचाई पर यह पाया जाता है। इसके अलावा पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, दक्षिण चीन, दक्षिण पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया में इसकी उपलब्धता है। चीन, इंडो-चाइना, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया में दवा बनाने के लि उपयोग किया जाता है।
19 देशों में किया जा रहा फल निर्यात
भारत से 19 देशों को एच. आइसोरा के फल निर्यात किए जाते हैं, जिनका 36 महीनों का मूल्य 274055 अमेरिकी डॉलर है। खेत पर स्थानीय कटाई करने वालों को प्रति किलो 0.3 अमेरिकी डॉलर मिलते हैं, जबकि विदेशों में इसे 2 अमेरिकी डॉलर में बेचा जा सकता है।
औषधीय पौधों से दवा कारगार
औषधीय पौधों से बनाने का प्रयोग किया जाता है, काफी कारगार दवा रहती है। पेटदर्द सहित अन्य शारीरिक बीमारियों को दूर किया जा सकता है।
– डॉ गौरव वर्मा, आयुर्वेद रत्न, मप्र







