
यश भारत की विशेष रिपोर्ट
नागमणि पांडेय
नवी मुंबई यश भारत|वाशी स्थित मुंबई कृषि उत्पन्न बाजार समिति (एपीएमसी) में किए गए स्टिंग में केले की गुणवत्ता और उन्हें पकाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में केले पकाने की प्रक्रिया दिखाई दे रही है। विशेष की केले के व्यापारीयो द्वारा ग्राहकों के जान से किए जा रहे खिलवाड़ किए जा रहे है इस को लेकर एपीएमसी और एफडीए प्रशासन के कार्य को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे है इस वीडियो के बाद अब सवाल यह है कि क्या केले प्राकृतिक तरीके से पकाए जा रहे हैं या किसी प्रतिबंधित रसायन का इस्तेमाल हो रहा है?
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एपीएमसी से नवी मुंबई के अलावा मुंबई, ठाणे और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर फलों की आपूर्ति होती है। ऐसे में यदि फलों को पकाने में खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों पर भी तय होनी चाहिए।
चमकदार केला देखकर न हों बेफिक्र!
बाजार में अक्सर एक जैसे रंग के, बेहद चमकदार और कम समय में पके हुए केले दिखाई देते हैं। लेकिन केवल रंग और बाहरी रूप देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि केला सुरक्षित तरीके से पकाया गया है।
खरीदारी करते समय उपभोक्ता इन बातों पर ध्यान दे सकते हैं कि असामान्य रूप से एकसमान और तेज पीला रंग, बाहर से पका, लेकिन अंदर से सख्त या कच्चा होना, असामान्य गंध या स्वाद महसूस होना,बहुत कम समय में बड़ी मात्रा में केले एक साथ पक जाना।हालांकि, इन लक्षणों के आधार पर किसी केले में प्रतिबंधित रसायन की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसकी वास्तविक जांच के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा नमूना लेकर प्रयोगशाला परीक्षण आवश्यक है।वीडियो में दिखाई गई प्रक्रिया नियमों के विपरीत पाई जाती है, तो यह केवल व्यापारियों का मामला नहीं रहेगा। सवाल उठेगा कि एपीएमसी परिसर में फलों की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी है? इस मामले में एपीएमसी के सचिव डॉ राजाराम धोंडकर ने बताया कि इस मामले में संबंधित व्यापारियों को नोटिस जारी करेंगे , जांच करने के साथ ही एफडीए रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने पर लाइसेंस रद्द की जाएगी ।







