कोरोना से मृत होमगार्ड के परिवार को मिलेगा योजना का लाभ,हाईकोर्ट ने 60 दिन में भुगतान के दिए निर्देश
मंडला जिला अस्पताल में थी ड्यूटी

जबलपुर, यश भारत। कोरोना महामारी के दौरान ड्यूटी करते हुए संक्रमण की चपेट में आए होमगार्ड कर्मी की मृत्यु के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उसके परिवार के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य शासन को मृतक की पत्नी को मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना के तहत लाभ देने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
न्यायमूर्ति मनिंदर एस. भट्टी की एकलपीठ ने WP No. 1881/2022, अर्चना पटेल विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य में 23 सितंबर 2026 को यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रविंद्रनाथ चतुर्वेदी और पार्थ पांडे ने पैरवी की।
मंडला जिला अस्पताल में थी ड्यूटी
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता के पति होमगार्ड के रूप में कार्यरत थे। कोरोना संक्रमण के दौरान उन्हें जिला अस्पताल, मंडला में महामारी की रोकथाम से संबंधित ड्यूटी पर तैनात किया गया था। इसी दौरान वे कोरोना संक्रमित हो गए और 18 मई 2021 को उनकी मृत्यु हो गई। जिला अस्पताल की ओर से भी उनके कोरोना रोकथाम संबंधी ड्यूटी करने का प्रमाण-पत्र जारी किया गया था।
मृत्यु के बाद पत्नी ने मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना के तहत आर्थिक सहायता के लिए आवेदन किया, लेकिन शासन ने लाभ देने से इनकार कर दिया। शासन का तर्क था कि मृतक होमगार्ड मानदेय के आधार पर कार्यरत थे और योजना में निर्धारित ‘एलिजिबल गवर्नमेंट सर्वेंट’ की श्रेणी में नहीं आते।
योजना का उद्देश्य देखते हुए कोर्ट ने दिया लाभ
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि मृतक को कोरोना महामारी की रोकथाम से संबंधित ड्यूटी सौंपी गई थी और यह तथ्य जिला अस्पताल के प्रमाण-पत्रों से भी प्रमाणित होता है। कोर्ट ने योजना के उद्देश्य पर विचार करते हुए कहा कि महामारी की रोकथाम में कर्तव्य निभाने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना योजना का उद्देश्य था। योजना में संविदा, दैनिक वेतनभोगी, तदर्थ और आउटसोर्स कर्मचारियों को भी शामिल किया गया था।
कोर्ट ने माना कि योजना में ‘मानदेय आधारित कर्मचारी’ शब्द का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने के बावजूद, जब मृतक द्वारा कोरोना रोकथाम की ड्यूटी किए जाने का तथ्य प्रमाणित है, तो केवल मानदेय के आधार पर परिवार को योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
60 दिन में देना होगा लाभ
हाईकोर्ट ने राज्य शासन और संबंधित अधिकारियों को योजना के क्लॉज 5.1 के तहत याचिकाकर्ता को लाभ 60 दिनों के भीतर प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किए जाने पर देय राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए मामले का निराकरण कर दिया।







