बच्चों की सुरक्षा से नहीं होगा कोई समझौता: कलेक्टर राघवेंद्र सिंह

जबलपुर। शहर में स्कूल वाहनों और वैन से स्कूल जाने वाले नौनिहालों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन बेहद सख्त नजर आ रहा है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने दोटूक शब्दों में कहा है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। पिछले दिनों गढ़ा क्षेत्र में हुए स्कूल वैन एक्सीडेंट के बाद से प्रशासन एक्शन मोड में है। इसी कड़ी में प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस की संयुक्त टीमों द्वारा लगातार दूसरे दिन सड़कों पर उतरकर व्यापक चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान जो स्कूल वैन मानक सुरक्षा नियमों का पालन नहीं कर रही थीं या नियम विरुद्ध संचालित हो रही थीं, उन्हें मौके पर ही जब्त कर लिया गया।
हड़ताल के बाद भी नहीं झुका प्रशासन, आरटीओ पहुंचे संचालक
प्रशासनिक सख्ती के विरोध में स्कूल वैन चालक दो दिनों के लिए हड़ताल पर भी चले गए थे, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा मानकों को लेकर कोई नरमी नहीं दिखाई। ट्रैफिक पुलिस का स्पष्ट कहना है कि कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी और 18-सूत्रीय तय गाइडलाइन के तहत ही वाहनों का संचालन करने दिया जाएगा।
* निजी वाहनों पर रोक: प्रशासन ने सबसे कड़ा रुख निजी (प्राइवेट) नंबर की गाड़ियों पर अपनाया है। स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जब तक निजी वैन संचालक आरटीओ से कमर्शियल लाइसेंस प्राप्त नहीं कर लेते, तब तक उन्हें संचालन की अनुमति नहीं मिलेगी। इसके बाद कई वैन संचालकों ने आरटीओ कार्यालय पहुंचकर कमर्शियल लाइसेंस के लिए आवेदन देना शुरू कर दिया है।
* ओवरलोडिंग पर शिकंजा: वैनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
* स्कूलों की भी तय होगी जवाबदेही: बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आरटीओ, ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन मिलकर काम कर रहे हैं। अब वैन संचालकों के साथ-साथ संबंधित स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है ताकि सुरक्षा में कोई ढिलाई न रहे।
जी हाँ, CBSE (केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) द्वारा स्कूलों, बसों और वैनों की सुरक्षा के लिए 18 सूत्रीय दिशा-निर्देश (18-Point CBSE Guidelines for School Transport) की एक स्पष्ट लिस्ट जारी की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आधार पर सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों के लिए इन 18 बिंदुओं का पालन करना अनिवार्य बनाया है:
सीबीएसई (CBSE) के 18-सूत्रीय सुरक्षा बिंदु:
* वाहनों का रंग: सभी स्कूल बसों का रंग पीला (Yellow) होना चाहिए।
* स्पष्ट नामंकन: बस के आगे और पीछे बड़े अक्षरों में “School Bus” लिखा होना अनिवार्य है।
* अनुबंधित वाहनों की पहचान: यदि वाहन किराए/अनुबंध पर है, तो उस पर स्पष्ट रूप से “On School Duty” लिखा होना चाहिए।
* संपर्क विवरण: वाहन के पीछे और अंदर स्कूल का नाम, फोन नंबर, RTO, पुलिस (112) और चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) नंबर साफ अक्षरों में दर्ज हों।
* खिड़कियों में सेफ्टी बार: खिड़कियों पर क्षैतिज (Horizontal) ग्रिल या जाली लगी होनी चाहिए ताकि बच्चे बाहर हाथ न निकाल सकें।
* दरवाजों में लॉक: बस/वैन के दरवाजों पर मजबूत और सुरक्षित लॉकिंग सिस्टम होना चाहिए।
* अग्निशामक यंत्र: वाहन में वैध तारीख वाला फर्स्ट-एड बॉक्स और अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher) होना अनिवार्य है।
* स्पीड गवर्नर: वाहनों में स्पीड गवर्नर लगा हो, जिससे गति सीमा 40 किमी/घंटा से अधिक न हो सके।
* GPS और CCTV: सभी स्कूल वाहनों में चालू हालत में GPS ट्रैकिंग सिस्टम और CCTV कैमरे लगे होना अनिवार्य हैं।
* चालक का अनुभव: ड्राइवर के पास भारी/व्यावसायिक वाहन चलाने का कम से कम 5 साल का अनुभव और वैध लाइसेंस होना चाहिए।
* ड्राइवर का आपराधिक/यातायात रिकॉर्ड: 1 वर्ष में 2 से अधिक चालान (स्पीडिंग/रेड लाइट) या शराब पीकर गाड़ी चलाने का मामला होने पर ड्राइवर अयोग्य माना जाएगा।
* चालक की पहचान: चालक को निर्धारित वर्दी (Uniform) पहननी होगी, जिस पर नाम और पहचान पत्र (Name Tag) लगा हो। चालक का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य है।
* बस अटेंडेंट/कंडक्टर: हर वाहन में एक प्रशिक्षित अटेंडेंट का होना जरूरी है। छात्राओं को ले जाने वाले वाहनों में महिला अटेंडेंट अनिवार्य है।
* क्षमता से अधिक बच्चे नहीं (नो ओवरलोडिंग): RTO द्वारा स्वीकृत सीटिंग क्षमता से अधिक बच्चे नहीं बैठाए जा सकते।
* बैग रखने की व्यवस्था: सीटों के नीचे या अंदर स्कूल बैग रखने की सुरक्षित जगह होनी चाहिए ताकि गलियारा (Aisle) खाली रहे।
* इमरजेंसी एग्जिट: आपातकालीन स्थिति के लिए सुरक्षित Emergency Ex…






