अंतिम दिन पूरे देश के 60 हजार कर्मियों में से सिर्फ 0.2 फीसदी ने दी सहमति

जबलपुर यश भारत । देश भर में फैली 42 आयुध निर्माणियों के 60 हजार कर्मचारियों में से सिर्फ 123 ने आयुध निगम में विलय प्रस्ताव को मंजूरी दी है।शेष कर्मचारी अपनी सेवानिवृति तक शासकीय कर्मचारी का दर्जा चाहा है। आयुध निगमों में कर्मचारियों के आमेलन के लिए 15 जुलाई से 15 अक्टूबर को शाम 5बजे तक समय दिया गया था। शाम 5बजे यदि जबलपुर के आयुध निर्माणियों की बात करें तो जीआईएफ में-शून्य जीसीएफ में 1718में से सिर्फ एक जेडब्लूएम और एक ने कोई विकल्प नहीं दिया। व्हीएफजे में1357में से सिर्फ तीन जेडब्लूएम ने विकल्प दिया जिसमें से एक पहले ही ट्रांसफर हो गया है। जबकि ओएफके में कुल 3794 में से सिर्फ 5कर्मियों ने निगम में विलय प्रस्ताव दिया है ।
उल्लेखनीय है कि 1अक्टूबर 2021 को सरकार ने रक्षा उत्पादन विभाग के आयुध निर्माणी बोर्ड को भंग कर सभी 42 आयुध निर्माणियों को 7 निगमों में विभाजित कर दिया था।तब से रक्षा मंत्रालय के तहत नियुक्ति पाये कर्मचारियों ने निगम में शामिल होने का विरोध किया था। सरकार ने सभी कर्मचारियों को मानित प्रतिनियुक्ति पर मान लिया था।एआईडीईएफ ने सरकार के निर्णय के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उसमें सरकार की ओर हलफनामा देकर कहा गया था कि किसी कर्मचारी को उसकी मर्जी के बिना निगमों में आमेलित नहीं किया जाएगा। रक्षा उत्पादन विभाग की ओर से अनेक बार इस संबंध में कर्मचारी प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए आमंत्रित किया। लेकिन उन्होंने विरोध कर बैठकों का बहिष्कार कर दिया।इसके बाद रक्षा उत्पादन विभाग की ओर आयुध निगमों में आमेलन के लिए 15 जुलाई से 15 अक्टूबर तक विकल्प भरने का समय दिया गया था। तिथि समाप्ति तक सातों निगमों में कुल 123 कर्मचारियों ने निगम मे शामिल होने का विकल्प दिया है। इस प्रकार लगभग सभी कर्मचारियों ने सेवानिवृति तक शासकीय सेवा में बने रहने का निश्चय किया है। इस संबंध में एआईडीईएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एस एन पाठक ने यश भारत से चर्चा में कहा कि यह उनके संगठन के तले लड़े गए संघर्ष की जीत है। जिसमें सभी कर्मचारियों ने एक जुटता दिखाई है।यह हमारे संघर्ष के मार्ग को प्रशस्त करता है।
सीजीएम भी मना कर हारे नहीं भरा विकल्प प्रपत्र
जीसीएफ में उस समय अजीब स्थिति बन गई जब टेंक गन शाप में कार्यरत एक कर्मचारी ने विकल्प प्रपत्र नहीं भरा। शुरू में उसके साथियों ने विकल्प प्रपत्र भरने को कहा कि आपको सरकारी कर्मचारी बने रहना है या निगम में जाना है फार्म तो भर दो। लेकिन उसने कोई रुचि नहीं दिखाई।इसके बाद क्रमशः अधिकारियों ने संपर्क किया लेकिन उसने तब भी अनसुना कर दिया। जानकारी के अनुसार अंतिम बार स्वयं मुख्यमहाप्रबंधक ने भी उसे विकल्प प्रपत्र भरने बोला।तब भी उसने फार्म नहीं भरा।पता चला है कि प्रबंधन की ओर से उसे पूर्व में भी दो बार आप्सन फार्म भरने की अनिवार्यता की जानकारी देने का पत्र दिया जा चुका था।







