भोपालमध्य प्रदेश

बिजली के उपकरण खराब हुए तो जवाबदेही ठेकेदार की होगी 

बिजली के उपकरण खराब हुए तो जवाबदेही ठेकेदार की होगी 
– रजिस्टर्ड वेंडर से खरीदे उपकरण भी ठेकेदार की जिम्मेदारी
– मप्र मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बीस दिन में बदला नियम 
भोपाल, यशभारत। मप्र विद्युत वितरण कंपनी एक बार फिर अपने नियमों में संशोधन करके विवादों में घिर गई है। महज 20 दिन के भीतर कंपनी ने पूर्व आदेशों में बदलाव करते हुए नया परिपत्र जारी किया है, जिसके तहत अब किसी भी प्रकार के उपकरण के खराब होने पर उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की होगी। यह निर्णय प्रदेशभर में काम कर रहे हजारों ठेकेदारों के लिए नई मुसीबत बन गया है, क्योंकि सभी उपकरण सीधे कंपनी के रजिस्टर्ड वेंडर से ही खरीदना अनिवार्य है। ऐसे में ठेकेदारों का सवाल है कि जब खरीद की अनुमति, दर और आपूर्तिकर्ता कंपनी तय करती है, तब खराबी की जवाबदेही उन पर कैसे डाली जा सकती है?
बीस दिन में दोबारा जारी किया परिपत्र 
कार्यालय प्रबंधक संचालक मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड ने पहले 3 अक्टूबर 2025 को पहला परिपत्र जारी किया था, लेकिन 23 अक्टूबर 2025 को इसे बदलते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी गई। ठेकेदारों का कहना है कि बार-बार नियमों में बदलाव से कामकाज प्रभावित हो रहा है और अनिश्चितता बढ़ रही है। वहीं कंपनी का तर्क है कि पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए रि-सैंपलिंग प्रक्रिया को और सख्त किया गया है।
यह रहेगा नई प्रक्रिया का ढांचा
नए परिपत्र में वितरण ट्रांसफार्मर की जांच और प्रतिस्थापन को लेकर सात प्रमुख बिंदु तय किए गए हैं।
– 01 जनवरी 2025 के बाद पूर्ण हुए कार्यों में लगाए गए सभी ट्रांसफार्मरों की प्रविष्टि ष्ठस्क्क पोर्टल पर प्रबंधक द्वारा अनिवार्य रूप से दर्ज की जाएगी।
– क्यूसीएम द्वारा ऑनलाइन रैंडम चयन के माध्यम से जिन ट्रांसफार्मरों को जांच हेतु चुना जाएगा, उनका क्रमांक संबंधित शाखा को भेजा जाएगा।
– रि-सैंपलिंग के लिए चुने गए ट्रांसफार्मर को सील, पंचनामा और ऑनलाइन गेट पास के साथ एनएबीएल प्रमाणित लैब में भेजा जाएगा।
– क्षेत्रवार जांच केंद्र निर्धारित किए गए हैं। ग्वालियर क्षेत्र के ट्रांसफार्मर ग्वालियर लैब और भोपाल क्षेत्र के ट्रांसफार्मर भोपाल लैब भेजे जाएंगे। भविष्य में गुना की लैब शुरू होने पर समीपवर्ती संभाग को वहां भेजा जा सकेगा।
– संबंधित लैब प्रभारी को एक दिन के भीतर रिपोर्ट जारी करने की जवाबदेही दी गई है। रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी।
– जांच में ट्रांसफार्मर सफल पाए जाने पर उसे पुन: मूल स्थान पर लगाया जाएगा।
– उप महाप्रबंधक (मेंटेनेंस) की जिम्मेदारी होगी, जबकि लेखांकन कार्य प्रबंधक द्वारा किया जाएगा।
ठेकेदारों की नाराजग़ी बढ़ी
नाम ना छापने की शर्त पर ठेकेदारों का कहना है कि ज्यादातर उपकरण कंपनी द्वारा तय वेंडरों से ही आते हैं। ऐसे में उत्पादन स्तर की खराबी या विनिर्माण दोष के लिए ठेकेदार पर जिम्मेदारी डालना अनुचित है। उनका यह भी आरोप है कि परिपत्र बिना पूर्व चर्चा और प्रतिक्रिया लिए लागू कर दिया गया, जिससे मैदान में काम करने वाले सभी ठेकेदारों पर अतिरिक्त आर्थिक और कानूनी दबाव बढ़ गया है। फिलहाल इतना तय है कि बार-बार नियम बदलने से विद्युत वितरण कार्यों की रफ्तार और ठेकेदारों की कार्य सुविधा दोनों प्रभावित होती दिख रही है।
ट्रांसफार्मर लेब टेस्ट में असफल होने की स्थिति में  
– लेब टेस्ट का व्यय संबंधित ठेकेदार द्वारा वहन किया जाएगा।
– टेस्ट में असफल ट्रांसफार्मर के विरूद्ध ठेकेदार द्वारा नवीन ट्रांसफार्मर लेब में टेस्ट करवाकर 15 दिवस में उपलब्ध कराया जाएगा।
– महाप्रबंधक द्वारा कार्रवाई पूर्ण होने तक सम्बंधित ठेकेदार के समस्त कार्य रोक दिए जाए जैसे- विलों का भुगतान, नवीन निविदा प्रक्रिया पर रोक, समस्त प्रकार के नवीन कार्यों पर रोक, डिस्काम स्तर पर ठेकेदार को अक्रियाशील किया जा सकता है।
– एनएबीएल. लेब की टेस्ट रिपोर्ट वर्क कम्प्लीशन के समय ठेकेदार द्वारा प्रस्तुत की गई थी एवं टेस्ट में वितरण ट्रांसफार्मर असफल हो जाने की स्थिति में उक्त लेब के विरूद्ध भी यथोचित कड़ी कार्रवाई अनुभाग द्वारा संपादित की जाएगी।

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