चार महीने पहले बना गड्ढा अब बन गया हादसे का खतरा : जिम्मेदारों की अनदेखी से वाहन चालकों में दहशत; दर्जनों गांवों को जिला मुख्यालय से जोड़ता है पुल

यशभारत डिंडोरी।जिला मुख्यालय को दर्जनों गांवों से जोड़ने वाले सारसताल पुल पर सड़क में बना गड्ढा अब वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। करीब चार महीने पहले पुल पर सड़क की सतह पर छोटा सा गड्ढा दिखाई दिया था, लेकिन समय रहते इसकी मरम्मत नहीं होने के कारण यह लगातार बढ़ता गया। अब स्थिति यह है कि पुल से गुजरने वाले वाहन चालकों को गड्ढे से बचकर निकलना पड़ रहा है। बारिश के दौरान गड्ढे में पानी भर जाने से इसकी गहराई का अंदाजा भी नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटना की आशंका और बढ़ गई है।
सारसताल पुल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। इस पुल से आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीण रोजाना जिला मुख्यालय की ओर आवागमन करते हैं। नौकरी, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जरूरी कामों के लिए लोगों का इसी मार्ग से आना-जाना होता है। इसके अलावा रोजाना बड़ी संख्या में दोपहिया, चारपहिया और अन्य वाहन भी पुल से गुजरते हैं। ऐसे में पुल पर लगातार बढ़ता गड्ढा अब केवल सड़क की खराबी नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बन गया है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब चार महीने पहले पुल पर सड़क में एक छोटा सा गड्ढा बना था। उस समय यदि इसकी मरम्मत करा दी जाती तो समस्या आसानी से दूर हो सकती थी, लेकिन जिम्मेदार विभाग द्वारा समय पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण गड्ढा धीरे-धीरे बड़ा होता गया। वाहनों की लगातार आवाजाही और बारिश के कारण सड़क की स्थिति और खराब हो गई।
अब पुल से गुजरते समय वाहन चालकों को अचानक गड्ढा सामने आने पर गति कम करनी पड़ती है। कई बार पीछे से आ रहे वाहन और सामने से आने वाले वाहनों के बीच बचने की कोशिश में स्थिति जोखिम भरी हो जाती है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह गड्ढा अधिक खतरनाक बताया जा रहा है।
बारिश में बढ़ी परेशानी
इन दिनों बारिश के कारण पुल की सड़क पर बने गड्ढे में पानी जमा हो जाता है। पानी भरने के बाद गड्ढे की वास्तविक गहराई और आकार दिखाई नहीं देता। अनजान वाहन चालक अचानक इसमें फंस जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि पर्याप्त रोशनी नहीं होने की स्थिति में गड्ढा दूर से दिखाई नहीं देता।
लोगों के अनुसार कई वाहन चालक इस गड्ढे की चपेट में आकर दुर्घटनाग्रस्त भी हो चुके हैं। हालांकि इन घटनाओं के संबंध में विभागीय स्तर पर आधिकारिक आंकड़े सामने नहीं आए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों में संभावित बड़े हादसे को लेकर चिंता बनी हुई है।
दर्जनों गांवों के आवागमन का प्रमुख रास्ता
सारसताल पुल केवल एक स्थानीय सड़क का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित है। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ग्रामीणों का आवागमन इसी रास्ते से होता है। विद्यार्थियों से लेकर मरीजों और कामकाजी लोगों तक को इस मार्ग से गुजरना पड़ता है।
ऐसे में पुल पर सड़क की खराब स्थिति का असर सीधे ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुल की सड़क समय रहते दुरुस्त नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और खराब हो सकती है।
बड़े हादसे के बाद जागेगा विभाग?
स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि जब गड्ढा छोटा था, तभी उसकी मरम्मत क्यों नहीं कराई गई। लोगों का कहना है कि सड़क की नियमित निगरानी और रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है। इसके बावजूद महीनों तक गड्ढे की मरम्मत नहीं होना जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभाग को किसी बड़े हादसे का इंतजार नहीं करना चाहिए। पुल पर बढ़ते गड्ढे को तत्काल भरकर सड़क की मरम्मत कराई जाए, ताकि वाहन चालकों और ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन मिल सके।
लोगों ने मांग की है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर पुल की सड़क की स्थिति का जायजा ले और स्थायी रूप से मरम्मत कराए। साथ ही पुल पर भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा न हो, इसके लिए सड़क की गुणवत्ता और रखरखाव की भी निगरानी की जाए।







