विजयनगर के रहवासी क्षेत्र में नियमो को ताक पर रखकर चल रहे अस्पताल
क्लीनिक लाइसेंस पर हो रहा गंभीर उपचार और सर्जरी, फायर सेफ्टी व्यवस्था पर भी लापरवाही

जबलपुर,यश भारत। विजयनगर क्षेत्र में आवासीय घरों और व्यावसायिक परिसरों के भीतर क्लीनिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के नाम पर अस्पताल संचालन किए जाने के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इन संस्थानों के पास या तो क्लीनिक संचालन का लाइसेंस है या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर की अनुमति, लेकिन यहां पर गंभीर मरीजों का उपचार और जटिल सर्जरी तक की जा रही हैं, जो नियमों के विपरीत होने के साथ-साथ बड़े खतरे को भी आमंत्रित कर सकती हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इन स्थानों पर न तो पर्याप्त चिकित्सा सुरक्षा मानक अपनाए जा रहे हैं और न ही आपातकालीन स्थिति से निपटने की कोई ठोस व्यवस्था मौजूद है। विशेष रूप से फायर सेफ्टी के मानकों की अनदेखी चिंता का विषय बनी हुई है। अधिकांश परिसरों में अग्निशमन यंत्र या सुरक्षा निकास जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं।
गौरतलब है कि कुछ वर्ष पूर्व दमोहना नाका क्षेत्र में इसी तरह की लापरवाही के चलते एक भीषण अग्निकांड हुआ था, जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ऐसे संचालन पर अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहे हैं। नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से नागरिकों ने तत्काल निरीक्षण कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ना कोई लेआउट ना कोई परमिशन
अस्पतालों के संचालक को लेकर और बिल्डिंग निर्माण को लेकर नगर निगम के साथ-साथ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के स्पष्ट दिशा निर्देश है उसके आधार पर ही अस्पताल के लिए भावनाओं का निर्माण हो सकता है लेकिन इन अस्पतालों में ना तो पार्किंग की व्यवस्था है ना आपातकालीन निकासी की व्यवस्था है और ना ही नियम के अनुसार निर्माण किया गया है ।यह सिर्फ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का लाइसेंस लेकर काम कर रहे हैं जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्पष्ट दिशा निर्देश दिए गए हैं कि यहां पर मरीज को भर्ती नहीं किया जा सकता है ना ही गंभीर मरीज को यहां रखा जा सकता है लेकिन इन सब दिशा निर्देशों का यहां खुला उल्लंघन हो रहा है।







