शहपुरा पुल मामले में माननीय हाईकोर्ट सख्त; रेलवे, MPRDC और राज्य सरकार को थमाया नोटिस
6 महीने से जनता त्रस्त, विभाग मस्त; अब कोर्ट ने पूछा- जब तक पुल नहीं बनता, पौड़ी रेलवे फाटक क्यों नहीं खोल रहे?

यशभारत, जबलपुर।
जबलपुर-भोपाल मुख्य मार्ग पर स्थित शहपुरा भिटौनी के क्षतिग्रस्त ओवरब्रिज मामले में आखिरकार माननीय हाईकोर्ट का डंडा चल गया है। हादसे को करीब 6 महीने बीत जाने के बाद भी कछुआ गति से चल रही मरम्मत और जनता को हो रही नरकीय परेशानी पर हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने राज्य सरकार, रेलवे और मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
रेलवे से तीखा सवाल: फाटक खोलने में क्या परेशानी है?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रेलवे की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल दागे। अदालत ने पूछा कि जब मुख्य मार्ग का पुल पिछले 6 महीने से टूटा पड़ा है और जनता परेशान हो रही है, तो वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर ‘पौड़ी रेलवे गेट’ को आम जनता के लिए क्यों नहीं खोला जा रहा है?
कोर्ट के इस तीखे रुख पर रेलवे की ओर से उपस्थित एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने जवाब देने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई में स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ उपस्थित होने का आदेश दिया है।
MPRDC से मांगी टाइम-लाइन; ‘तारीख पर तारीख’ नहीं चलेगी!
हाईकोर्ट ने सड़क निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदार एजेंसी MPRDC को भी आड़े हाथों लिया है। कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं कि पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत को लेकर अब तक क्या काम हुआ है, इसकी पूरी कुंडली पेश की जाए। साथ ही कोर्ट ने दो टूक पूछा है कि मरम्मत का काम कब तक पूरा होगा? इसकी अंतिम समय-सीमा (डेडलाइन) तय करके बताएं। मामले की अगली सुनवाई अब 2 जुलाई को होगी।
सुविधा शून्य, पर टोल वसूली पूरी!
‘यश भारत’ ने पहले भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था कि दिसंबर महीने में पुल टूटने के बाद से हाईवे का पूरा ट्रैफिक शहपुरा भिटौनी की संकरी रहवासी बस्ती और कृषि उपज मंडी की तरफ मोड़ दिया गया है। इसके कारण यहां चौबीसों घंटे रेंगता हुआ जाम और धूल के गुबार से स्थानीय नागरिक और वाहन चालक नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासी राजेश सिंह और अन्य नागरिकों ने पौड़ी फाटक खोलने की पुरजोर मांग की है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मुख्य मार्ग बंद है और जनता को गड्ढों व जाम से जूझना पड़ रहा है, तो हाईवे पर अंधाधुंध टोल वसूली किस बात की की जा रही है?
अब देखना यह है कि 2 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में ये सुस्त विभाग कोर्ट के सामने क्या बहानेबाजी करते हैं या फिर जनता को सच में कोई बड़ी राहत मिलती है।







