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वन्य प्राणियों की सुरक्षा को लेकर बना एक्शन प्लान – हाथियों की आवाजाही और बाघों के संघर्ष पर वन अमला बढ़ाएगा  निगरानी

वन्य प्राणियों की सुरक्षा को लेकर बना एक्शन प्लान
– हाथियों की आवाजाही और बाघों के संघर्ष पर वन अमला बढ़ाएगा  निगरानी
भोपाल, यश भारत। 
प्रदेश के टाइगर रिजर्व में वन्य प्रणियों क़ी सुरक्षा के लिए एक्शन प्लान तैयार किया गया है। वन अधिकारियों ने महत्वपूर्ण समीक्षा कर विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बाघों और हाथियों की सुरक्षा बढ़ाना, वन्यजीवों के आपसी संघर्ष की घटनाओं को कम करना तथा जंगल से लगे गांवों में मानव-वन्यजीव टकराव को रोकना है।
बाधवगढ़ टाइगर रिजर्व का मध्यप्रदेश की प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. समीता राजोरा और अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव एल. कृष्णमूर्ति ने ताला क्षेत्र में हाथियों की निगरानी व्यवस्था का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने हाथियों की आवाजाही पर नजर रखने की व्यवस्था, जंगल से मिलने वाली सूचनाओं और सुरक्षा प्रबंधों की विस्तार से समीक्षा की।
अधिकारियों ने निर्देश दिए कि हाथियों के झुंड की गतिविधियों की लगातार जानकारी रखी जाए, ताकि वे गांवों के पास पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों को सतर्क किया जा सके और किसी भी प्रकार के टकराव की स्थिति से बचा जा सके। बैठक में नेशनल टाइगर कांजेर्वेशन अथॉरिटी के उप महानिरीक्षक डॉ. वैभव माथुर भी शामिल हुए। 
बाघों की मौत के मामलों पर विस्तार से चर्चा
प्रदेश में बाघों की मौत के मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि कई बार बाघ अपने क्षेत्र को लेकर आपस में भिड़ जाते हैं, जिससे गंभीर संघर्ष की स्थिति बनती है और कभी-कभी उनकी मौत भी हो जाती है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में वन्यजीवों के अवैध शिकार और अन्य अपराधों को रोकने, जंगलों में गश्त मजबूत करने तथा बाघ और हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने पर जोर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि बांधवगढ़ क्षेत्र वन्यजीवों से समृद्ध है, इसलिए यहां सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और सुदृढ़ किया जा रहा है।
– इस महत्वपूर्ण बैठक में तय किया गया कि जंगल के भीतर और आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई जाएगी, ताकि वन्य प्राणियों की सुरक्षा मजबूत हो सके और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम किया जा सके।
– एल कृष्ण मूर्ति, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव , मप्र

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