
जबलपुर। शहर में एक बार फिर अंडरवर्ल्ड से जुड़े कुख्यात बदमाश अरुण तिवारी की एंट्री ने सनसनी फैला दी है। हाल ही में जबलपुर जिला अदालत परिसर में यह शख्स खुलेआम देखा गया, जहां उसने कुछ वकीलों के साथ तीखी बहस की और एक मामले में उन्हें धमकी देने तक की बात सामने आई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उसका व्यवहार आक्रामक था और वह खुद को प्रभावशाली बताते हुए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा था। घटना के बाद वकीलों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने सामूहिक रूप से इसकी शिकायत एसपी कार्यालय, थाना omti और संजीवनी नगर में दर्ज कराई। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि शहर में एक बार फिर गैंगस्टर की सक्रियता को लेकर चिंता भी बढ़ा दी है।
आखिर क्या है मामला
शिकायतकर्ता अधिवक्ताओं के अनुसार अरुण तिवारी बीते करीब आठ माह से बंधक धोखाधड़ी के आरोप में जेल में बंद एक आरोपी की जमानत और कानूनी सहायता के लिए लगातार प्रयासरत था। वह कई बार जेल में उससे मुलाकात कर चुका था और उसके घर पर भी रह रहा था। बताया जा रहा है कि आरोपी की पत्नी और साले उसे संरक्षण दे रहे थे। इसी दौरान वकीलों ने जब उसकी गतिविधियों पर आपत्ति जताई, तो वह उनसे बहस करने लगा और कथित रूप से धमकी देने की बात भी सामने आई।
दाऊद की तलाश में पाकिस्तान तक पहुंचा था आरोपी, बेहद खतरनाक मिशन
वर्ष 2016 में जबलपुर पुलिस ने जिस शख्स को गिरफ्तार किया था, वही अरुण तिवारी है, जो भारत के मोस्ट वांटेड अपराधी दाऊद इब्राहिम का पता लगाने के लिए पाकिस्तान तक जा चुका था। यह मिशन कोई सामान्य काम नहीं था, बल्कि बेहद गोपनीय और जोखिम भरा ऑपरेशन था। जानकारी के मुताबिक, उसे छोटा राजन के निर्देश पर भेजा गया था, ताकि वह दाऊद की लोकेशन, सुरक्षा व्यवस्था और गतिविधियों की सटीक जानकारी जुटा सके। इस तरह के मिशन में पकड़े जाने पर जान का खतरा भी बना रहता है, लेकिन इसके बावजूद अरुण तिवारी को यह जिम्मेदारी दी गई थी, जिससे उसके गैंग में महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है।
1993 ब्लास्ट के बाद अंडरवर्ल्ड की दुश्मनी बनी खूनी जंग
बताया जाता है कि दाऊद इब्राहिम 1993 के मुंबई बम धमाकों से ठीक पहले भारत छोड़कर फरार हो गया था और तब से वह लगातार फरार है। इसके बाद से भारत, अमेरिका सहित कई देशों की खुफिया एजेंसियां उसकी तलाश में लगी हुई हैं। वहीं दूसरी ओर, छोटा राजन और दाऊद के बीच दुश्मनी इतनी बढ़ गई कि यह गैंगवार एक तरह से अंतरराष्ट्रीय स्तर की जंग बन गई। इसी दुश्मनी के चलते राजन ने अपने खास गुर्गों को विदेशों तक भेजकर दाऊद की रेकी कराने की योजना बनाई थी।
लूट और अपहरण की कई वारदातों में रहा शामिल, शहर में फैलाई दहशत
अरुण तिवारी का आपराधिक इतिहास काफी लंबा और गंभीर रहा है। वर्ष 2013 में उसने जबलपुर के व्यापारी विजय अरोरा को नशीला पदार्थ खिलाकर बेहोश किया और लाखों रुपए लूटकर फरार हो गया था। इतना ही नहीं, उसने घटना के बाद पहचान छिपाने के लिए व्यापारी की कार को कटनी रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया था। इसके अलावा वह खंडवा के प्रॉपर्टी डीलर राजेश जैन के अपहरण मामले में भी मुख्य आरोपी रहा है, जिसमें उसे इंदौर ले जाकर गैंग के अन्य सदस्यों के हवाले किया गया था। इन घटनाओं ने उस समय पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना दिया था।
छोटा राजन से गुरु साटम गैंग तक फैला नेटवर्क, कई गिरोहों से जुड़ा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अरुण तिवारी केवल एक गैंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने समय-समय पर कई बड़े आपराधिक गिरोहों के साथ काम किया। वह छोटा राजन के अलावा गुरु साटम और भदौरिया गैंग से भी जुड़ा रहा है। इन गिरोहों के साथ मिलकर उसने मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में कई गंभीर अपराधों को अंजाम दिया। गैंग बदलकर अपराध करने की उसकी यह रणनीति पुलिस के लिए उसे पकड़ना और भी मुश्किल बना देती थी।
एसटीएफ ऑपरेशन में वाराणसी से गिरफ्तारी, पहले भी था इनामी बदमाश
तत्कालीन सीएसपी अजीम खान के अनुसार, अरुण तिवारी लंबे समय तक फरार रहा और उस पर खंडवा पुलिस ने 25 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था। मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर एसटीएफ ने 26 जून 2016 को वाराणसी स्थित उसके पुश्तैनी गांव नकटी भवानी में दबिश दी और उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे जबलपुर जेल भेजा गया, जहां वह कई मामलों में विचाराधीन कैदी के रूप में रखा गया था।
एमटेक पास, कई भाषाओं का जानकार लेकिन चुना अपराध का रास्ता
अरुण तिवारी की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वह एमटेक तक शिक्षित है और हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू सहित कई भाषाओं का अच्छा ज्ञान रखता है। बावजूद इसके उसने अपराध की दुनिया को चुना। बताया जाता है कि वह सबसे पहले कुख्यात अपराधी उदयभान के संपर्क में आया, जिसने उसे मुंबई पहुंचाया। वहीं उसकी मुलाकात छोटा राजन गैंग से हुई और धीरे-धीरे वह उसका खास गुर्गा बन गया।
शहर में फिर बढ़ा खतरा, पुलिस अलर्ट मोड पर
जबलपुर में अरुण तिवारी की दोबारा सक्रियता ने पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अंडरवर्ल्ड से जुड़े उसके पुराने रिकॉर्ड और खतरनाक नेटवर्क को देखते हुए अब उसकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि शहर में शांति और सुरक्षा बनी रहे।
पुलिस का बयान
मामले को लेकर ओमती थाना प्रभारी राजपाल बघेल ने बताया कि शिकायतकर्ताओं द्वारा आवेदन दिया गया है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि अधिवक्ताओं द्वारा लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो आरोपी गैंगस्टर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।








