गनीमत रही बच गई जान, लेकिन क्या हादसों के मुहाने पर खड़ा है शहर का सबसे प्रमुख बाजार?

न्यू मार्केट अग्निकांड: गनीमत रही बच गई जान, लेकिन क्या हादसों के मुहाने पर खड़ा है शहर का सबसे प्रमुख बाजार?
भोपाल, यशभारत। राजधानी भोपाल का दिल कहे जाने वाले न्यू मार्केट में गुरुवार दोपहर अचानक उठी 25 फीट ऊंची लपटों ने न केवल 5-6 दुकानों और दर्जनभर रेहड़ियों को अपनी चपेट में लिया, बल्कि बाज़ार के सुरक्षा इंतजामों पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
छोले-भटूरे की एक दुकान में लगी इस भीषण आग के दौरान करीब 50 से 60 लोग अंदर मौजूद थे। गनीमत रही कि समय रहते सभी लोग बाहर भागने में सफल रहे और किसी जनहानि की खबर नहीं आई। दमकल विभाग की 15 से अधिक गाड़ियों ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू तो पा लिया, लेकिन इस घटना ने बाज़ार के दैनिक सुरक्षा प्रोटोकॉल और संकीर्ण रास्तों की बड़ी चुनौती को उजागर कर दिया है।
संकीर्ण गलियों और रेहड़ियों के बीच जोखिम
हादसे के बाद बाज़ार के व्यापारियों और आगंतुकों में अफरा-तफरी मच गई। करीब दो किलोमीटर दूर से उठते धुएं के गुबार को देखकर हर कोई सहम गया था। न्यू मार्केट जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में दुकानों के पास अस्थाई अतिक्रमण, खुले तार और रसोई गैस/तेल के इस्तेमाल वाली दुकानें एक बड़े खतरे का कारण बन रही हैं।
न्यू मार्केट एसोसिएशन, भोपाल के अध्यक्ष सतीश गंगराड़े ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि फायर ब्रिगेड के वक्त पर पहुंचने की वजह से आग आसपास के अन्य बड़े शो-रूम और परिसर में फैलने से बच गई। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन पूरी तरह से प्रभावित दुकानदारों के साथ खड़ी है और नुकसान का आकलन बाज़ार लौटकर किया जाएगा।







