बोट क्लब को प्लास्टिक मुक्त बनाने का दावा फेल – 30 किलो पॉलीथीन मिलने से खुली व्यवस्था की पोल

बोट क्लब को प्लास्टिक मुक्त बनाने का दावा फेल
– 30 किलो पॉलीथीन मिलने से खुली व्यवस्था की पोल
भोपाल, यश भारत । राजधानी भोपाल की पहचान मानी जाने वाली बड़ी झील के किनारे स्थित बोट क्लब क्षेत्र को पॉलीथीन और सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए नगर निगम ने नया अभियान शुरू किया है। हालांकि अभियान के पहले ही दिन की कार्रवाई ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि क्षेत्र में पहले से प्रतिबंध लागू है, तो फिर इतनी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित सामग्री खुलेआम कैसे उपयोग हो रही थी।
नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गुरुवार को बोट क्लब क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए करीब 30 किलोग्राम पॉलीथीन, सिंगल यूज प्लास्टिक और थर्माकोल सामग्री जब्त की। साथ ही 15 व्यवसायियों और वेंडर्स के खिलाफ स्पॉट फाइन की कार्रवाई करते हुए 5 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया। कार्रवाई के दौरान यह सामने आया कि कई दुकानदार और ठेले संचालक खाद्य सामग्री परोसने तथा पैकिंग के लिए प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग कर रहे थे।
नगर निगम द्वारा बोट क्लब क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त बनाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन कार्रवाई में सामने आए तथ्य यह संकेत देते हैं कि झील किनारे प्रतिबंधित सामग्री का उपयोग लंबे समय से जारी था और निगरानी व्यवस्था प्रभावी नहीं रही। पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के नाम पर समय-समय पर अभियान चलाए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका असर सीमित दिखाई देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी झील भोपाल की जीवनरेखा है और उसके आसपास प्लास्टिक एवं थर्माकोल का उपयोग सीधे जल प्रदूषण को बढ़ावा देता है। इसके बावजूद बोट क्लब जैसे संवेदनशील क्षेत्र में प्रतिबंधित सामग्री का इस्तेमाल होना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। सवाल यह भी है कि यदि नियमित निगरानी और जांच होती रहती, तो इतनी मात्रा में प्लास्टिक सामग्री एकत्र ही नहीं होती।
नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन के निर्देश पर शुरू किए गए इस अभियान के दौरान वेंडर्स को पॉलीथीन, सिंगल यूज प्लास्टिक और थर्माकोल के स्थान पर वैकल्पिक सामग्री अपनाने की सलाह दी गई। लेकिन केवल समझाइश और सीमित जुर्माने से समस्या का स्थायी समाधान निकल पाएगा या नहीं, इस पर संदेह बना हुआ है। 15 मामलों में कुल 5 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया, जो प्रति प्रकरण औसतन बहुत कम राशि बैठती है। ऐसे में प्रतिबंधित सामग्री का उपयोग करने वालों के लिए यह कार्रवाई कितनी प्रभावी साबित होगी, यह बड़ा सवाल है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम को केवल अभियान चलाने के बजाय नियमित निरीक्षण, सख्त दंड और वैकल्पिक सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए। अन्यथा हर कुछ महीनों में अभियान चलाकर प्लास्टिक जब्त करने और जुर्माना वसूलने की कवायद होती रहेगी, जबकि झील और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां जारी रहेंगी।







