खत्म होती बावड़ियां, अतिक्रमण और लापरवाही से मिटती भोपाल की ऐतिहासिक पहचान
Bhopal's historic identity is being eroded by vanishing stepwells, encroachment and negligence.

खत्म होती बावड़ियां, अतिक्रमण और लापरवाही से मिटती भोपाल की ऐतिहासिक पहचान
भोपाल, यश भारत। नवाबों के शहर भोपाल की ऐतिहासिक धरोहर रही बावड़ियां अब अपनी पहचान खोती जा रही हैं। अतिक्रमण और प्रशासनिक लापरवाही के चलते ये प्राचीन जल संरचनाएं धीरे-धीरे खत्म होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
जानकारी के अनुसार राजधानी में कभी करीब 12 बावड़ियां हुआ करती थीं लेकिन आज इनमें से ज्यादातर पर कब्जा हो चुका है। कहीं लोगों ने दीवारें खड़ी कर दी हैं, तो कहीं इन ऐतिहासिक संरचनाओं को समतल कर निजी उपयोग में लिया जा रहा है।
वर्तमान में शहर में सिर्फ 9 बावड़ियां ही बची हैं, लेकिन उनकी स्थिति बेहद खराब है। जमीनी पड़ताल में सामने आया कि कई बावड़ियों का पानी इतना गंदा हो चुका है कि वह इंसानों तो क्या, पशुओं के उपयोग के लायक भी नहीं बचा है। करीब 30 एकड़ में फैले बड़े बाग क्षेत्र की सबसे बड़ी बावड़ी भी बदहाली का शिकार है। कभी यह बावड़ी आम जनता के पेयजल और गर्मियों में ठहरने का प्रमुख स्रोत हुआ करती थी, लेकिन आज यहां गंदगी का अंबार लगा है। हैरानी की बात यह है कि उद्घाटन के बाद से अब तक इसकी नियमित सफाई तक नहीं की गई।
बावड़ियां सिर्फ जल स्रोत नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते इन धरोहरों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाएगा या फिर बावड़ियां आने वाले समय में सिर्फ इतिहास बनकर रह जाएंगी।






