भोपाल

प्रदेश से पहले जिलों की गठित होगी कार्यकारिणी जिलों के नेताओं ने भोपाल में डाला डेरा 

प्रदेश से पहले जिलों की गठित होगी कार्यकारिणी जिलों के नेताओं ने भोपाल में डाला डेरा
भोपाल, यशभारत। प्रदेश में बीते छही माह से जिलाध्यक्षों को अकेले ही संगठन का काम देखना पड़ रहा है। इसकी वजह है, नए जिलाध्यक्ष बनने के बाद अब उनकी कार्यकारिणी का गठन नहीं कर पाना। अब पार्टी के नए प्रदेशाध्यक्ष के पद पर हेमंत खंडेलवाल की ताजपोशी होने के बाद माना जा रहा है कि जिलों के पदाधिकारियों के नामों की घोषणा जल्द हो सकती है। उधर पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रदेश पदाधिकारियों से पहले जिलों के पदाधिकरियों की घोषणा कर दी जाएगी। दरअसल प्रदेश की कमान मिलने के बाद हेमंत खंडेलवाल द्वारा मैदानी स्तर पर पार्टी की सक्रियता बढ़ाने और उसे और मजबूत करने पर फोकस किया जाना है। इसके लिए वे जल्द से जल्द जिलों में नई टीम चाहते हैं। उधर, जिलों में पद के दावेदारों ने अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए भोपाल की दौड़ शुरु कर दी है। जिलाध्यक्षों के सामने टीम चयन को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। पुराने कार्यकर्ताओं, नए शामिल हुए नेताओं और दूसरे दलों से आए नेताओं को शामिल कर उनके बीच संतुलन साधना मुश्किल भरा काम बना हुआ है। इसमें भी जिलों में अध्यक्ष के बाद सबसे महत्वपूर्ण पद जिला महामंत्री का माना जा रहा है। महामंत्री की दौड़ में शामिल नेता भोपाल तक सक्रियता दिखाकर अपने दावेदारी पुख्ता करने में लगे हुए हैं। जिलों में संगठन की टीम में जातीय संतुलन भी बड़ी चुनौती है। इसमें हर वर्ग के नेताओं और कार्यकर्ताओं को साधना है। गौरतलब है कि पार्टी के 62 जिलाध्यक्षों में से 30 सवर्ण वर्ग से हैं। इनमें से 16 ब्राह्मण, 7 राजपूत और बाकी वैश्य समाज से हैं। इसके अलावा 25 अन्य पिछड़ा वर्ग और 7 अनुसूचित जाति-जनजाति से हैं। 7 जिलों में महिला नेत्रियों को जिले की कमान दी गई है। जिला अध्यक्षों के बाद अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा अपने-अपने समर्थकों को जिलों में पदाधिकारी बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं जिससे सत्ता के साथ ही संगठन पर भी उननकी पकड़ मजबूत बन सके। इसकी वजह से जिलों में अंदरूनी खींचतान की स्थिति बन गई है। उधर, जिलाध्यों के सामने सबसे विकट चुनौति उने कार्यकर्ताओं को लेकर है, जो बीते विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी में शामिल हुए हैं। उनमें कई प्रभावशाली कार्यकर्ता हैं। इन कार्यकर्ताओं को भी पदाधिकारी बनाने का दबाव बना हुआ है। इनमें से कई भाजपा में शामिल हो चुके बड़े नेताओं के खास समर्थक हैं। इसके साथ ही उपाध्यक्ष, महामंत्री, मंत्री सहित मोर्चा व प्रकोष्ठों में शामिल होने के लिए कई नेता पैरवी में लगे हैं। वहीं, भाजपा पदाधिकारियों का कहना है कि योग्यतानुसार सभी कार्यकर्ताओं को उचित जिम्मेदारी दी जाएगी। सभी से राय लेकर टीम बनाई जाएगी और मन बड़ा रखकर समन्वय के साथ कार्य करेंगे। दलबदल करने वाले नेताओं की भी अपेक्षा पिछले दो वर्षों में लगभग ढाई लाख कार्यकर्ता विभिन्न दलों से भाजपा में शामिल हुए हैं। इनमें से अधिकांश कांग्रेस पृष्ठभूमि से हैं। इन नेताओं में सरपंच से लेकर पूर्व विधायक व मंत्री तक शामिल हैं। वे अब जिला संगठन में अपनी भूमिका की अपेक्षा कर रहे हैं। इस तरह की होगी जिला कार्यकारिणी जिला समिति में अध्यक्ष के साथ 8 उपाध्यक्ष होंगे। इसके अलावा 3 महामंत्री, 8 सचिव और एक कोषाध्यक्ष का एक पद भी रहेगा। इसके अलावा कार्यकारिणी में 7 महिलाएं और 2 अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को शामिल करना अनिवार्य है। जिले में 30 कार्यसमिति सदस्य बनाए जा सकेंगे।

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