अष्टांग योग से बदलेगी बंदियों की दिनचर्या, जेल में सात दिवसीय योग सप्ताह शुरू
बंदियों के स्वास्थ्य संतुलन के लिए शुरू हुआ योग सप्ताह

जबलपुर, यश भारत। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर जेल परिसर में बंदियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सात दिवसीय ‘योग सप्ताह’ का शुभारंभ किया गया। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से आयोजित यह विशेष अभियान 15 जून से शुरू होकर 21 जून तक चलेगा। कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना और उन्हें योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित करना है।

कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति सहित न्यायपालिका के वरिष्ठ न्यायमूर्ति एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने योग को जीवन का अभिन्न हिस्सा बताते हुए बंदियों से इसे नियमित दिनचर्या में शामिल करने की अपील की।

योग विशेषज्ञ डॉ. पराग जैन ने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि अक्सर लोग बीमारी आने के बाद योग अपनाने का प्रयास करते हैं, जबकि योग का वास्तविक उद्देश्य बीमारी से पहले शरीर और मन को स्वस्थ बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति नियमित रूप से योग करता है तो वह अनेक शारीरिक और मानसिक समस्याओं से स्वयं को दूर रख सकता है।
उन्होंने अष्टांग योग की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए बताया कि यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि—ये आठ चरण व्यक्ति को संतुलित और अनुशासित जीवन की ओर ले जाते हैं। इस क्रम को अपनाने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास, भावनात्मक संतुलन और बेहतर स्वास्थ्य प्राप्त होता है।
जेल प्रशासन ने कहा कि योग सप्ताह का उद्देश्य केवल एक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि बंदियों के भीतर दीर्घकालिक स्वास्थ्य जागरूकता विकसित करना है।







