सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप, आज निकलेगा टॉर्च लाइट मार्च

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप, आज निकलेगा टॉर्च लाइट मार्च
– अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई की मांग
– रहवासियों का कहना सीलिंग के बाद उन्हीं दुकानों पर लगे टू लेट के बोर्ड
भोपाल, यश भारत । आवासीय क्षेत्रों में अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ भोपाल के रहवासियों का आक्रोश आज सड़क पर दिखाई देगा। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद कथित अवैध निर्माण और आवासीय भूखंडों के व्यावसायिक उपयोग पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए नागरिक आज 22 अगस्त की शाम टॉर्च लाइट मार्च निकालेंगे। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के नेतृत्व में प्रस्तावित मार्च सेवय मार्केट से शुरू होकर त्रिलंगा होते हुए पुराने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय परिसर के सामने समाप्त होगा।
रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम ने 1 अगस्त को कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की थी। कार्रवाई के बाद कई संस्थानों ने अपने प्रतिष्ठानों पर निगम के निर्देश पर बंद होने की सूचना भी लगाई थी। अब उन्हीं स्थानों पर ‘TO-LET’ के बोर्ड दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। रहवासियों का कहना है कि यदि किसी परिसर को अवैध व्यावसायिक गतिविधि के कारण बंद किया गया था तो वहां नए किरायेदारों के लिए बोर्ड लगना कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।
नोटिस और सर्वे से आगे कार्रवाई की मांग
रहवासियों के अनुसार, 20 मई 2026 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद आवासीय परिसरों में किए जा रहे गैरकानूनी निर्माण और व्यावसायिक उपयोग के मामलों में कार्रवाई तथा एक्शन टेकन रिपोर्ट की प्रक्रिया आगे बढ़ी। नगर निगम ने भी कई स्थानों पर अवैध निर्माण चिन्हित करने और कार्रवाई करने का दावा किया। अब नागरिकों का सवाल है कि चिन्हित निर्माणों के खिलाफ सीलिंग और अन्य वैधानिक कार्रवाई कब होगी।
संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति का कहना है कि केवल नोटिस जारी करने, सर्वे करने और कागजी कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनकी प्रमुख मांग है कि जिन निर्माणों को नियम विरुद्ध पाया गया है, उनके खिलाफ कानून के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जाए।
वर्षों से उठा रहे हैं आवाज
मामले से जुड़े याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का कहना है कि वे अरेरा कॉलोनी सहित भोपाल के विभिन्न आवासीय क्षेत्रों में अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों का मुद्दा लंबे समय से प्रशासन के सामने उठाते रहे हैं। उनका आरोप है कि समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां लगातार बढ़ती गईं।
उन्होंने कहा कि आवासीय भूखंडों पर बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालन से पार्किंग, यातायात, प्रदूषण और सार्वजनिक सुविधाओं पर दबाव बढ़ रहा है। इससे रहवासियों की शांति और सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है। त्रिपाठी के मुताबिक, यदि एक दिन की कार्रवाई से किसी क्षेत्र में यातायात और अतिक्रमण की स्थिति सुधर सकती है तो कार्रवाई को लगातार जारी रखने में क्या बाधा है।
व्यापारियों के खिलाफ नहीं, नियमों के पक्ष में संघर्ष
रहवासियों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या व्यापारी के खिलाफ नहीं है। वे आवासीय क्षेत्रों के मूल स्वरूप को बनाए रखने और नियमों के समान रूप से पालन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि आवासीय इलाकों में लगातार व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ती रहीं तो शहर की नियोजित संरचना, यातायात व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं पर इसका असर पड़ेगा।







