आधार रियल्टी घोटाला: गरीबों के हक पर डाका, बंधक जमीन बेची, FIR दर्ज

आधार रियल्टी घोटाला: गरीबों के हक पर डाका, बंधक जमीन बेची, FIR दर्ज
भोपाल: आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच में बड़ा रियल एस्टेट घोटाला उजागर हुआ है। कोलार क्षेत्र में आधार रियल्टी फर्म ने नगर निगम के नाम पर बंधक रखी गई जमीन को गैरकानूनी तरीके से बेच दिया। इतना ही नहीं, गरीबों के लिए बनाए जाने वाले EWS और LIG फ्लैट्स का निर्माण भी जानबूझकर नहीं किया गया।
जांच में यह सामने आया है कि “आधार सिम्फनी” परियोजना में नगर निगम के लिए सुरक्षित रखे गए कुल 45 फ्लैट्स को बिना किसी अनुमति के श्रीमती प्रिया हरपलानी के नाम बेचा गया, जबकि वे फ्लैट्स पहले से ही नगर निगम के पक्ष में वैध रूप से बंधक थे।
क्या है मामला:
2011 में बनी फर्म में दिलीप बच्चानी, हर्षिता बच्चानी और आशीष श्रीवास्तव थे साझेदार
2014 में नगर निगम के पक्ष में 47 फ्लैट्स बंधक रखे गए
2017 में संशोधन कर 45 फ्लैट्स की बंधक स्थिति तय हुई
नियमों के खिलाफ 2022 में श्रीमती हरपलानी को बेचा गया बंधक फ्लैट
दस्तावेजों में झूठी जानकारी — “संपत्ति बंधक से मुक्त” बताई गई
EOW की रिपोर्ट में हुआ खुलासा:
क्रेता को बंधक की जानकारी थी, फिर भी सौदा किया गया
गरीबों के लिए बनना था आवास, लेकिन बाजार दर पर बेचे गए सभी फ्लैट्स
नगर निगम को नहीं दी गई कोई पूर्व सूचना या अनुमति
शासन की सामाजिक योजना को बड़ा झटका
जांच के आधार पर श्री दिलीप बच्चानी, श्रीमती हर्षिता बच्चानी और श्रीमती प्रिया हरपलानी पर धारा 406 (न्यासभंग), 420 (धोखाधड़ी) और 120-B (आपराधिक साजिश) के तहत FIR दर्ज कर ली गई है। इस मामले ने नगर निगम की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। क्या नगर निगम समय पर कार्रवाई कर पाता तो ये घोटाला रोका जा सकता था? प्रशासन की लापरवाही ने गरीबों के घर का सपना तोड़ा है।







