जल संस्कृति और संवेदनाओं से सजी पानी नामा की अनूठी प्रस्तुति , गीत, संगीत और संवादों के माध्यम से दिया जल संरक्षण का संदेश

जल संस्कृति और संवेदनाओं से सजी पानी नामा की अनूठी प्रस्तुति
गीत, संगीत और संवादों के माध्यम से दिया जल संरक्षण का संदेश
भोपाल, यश भारत। भारतीय संस्कृति में जल को जीवन और संवेदनाओं का आधार माना गया है। इसी भाव को केंद्र में रखकर आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुति अमृतमय जलमय और पानी नामा ने दर्शकों को संगीत साहित्य और दर्शन की अद्भुत यात्रा से रूबरू कराया। कार्यक्रम में जल के महत्व प्रकृति प्रेम और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को गीत संवाद और नृत्य के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि त्रिनिदाद और टोबैगो के हाई कमिश्नर चंद्र दत्त सिंह ने भारत की सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिकता के दौर में भी भारत ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों की यात्रा के बावजूद भारत जैसी बहुआयामी संस्कृति कहीं देखने को नहीं मिली। वहीं नेपाल दूतावास के प्रथम सचिव दीपक पोरखिरे ने भारत नेपाल संबंधों को सांस्कृतिक रूप से गहरा बताते हुए कहा कि भारत आकर उन्हें अपने गांव जैसा अपनापन महसूस हुआ। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पानी नामा की संगीतमय प्रस्तुति रही। इसमें बारिश नदी सावन और पनघट को जीवन के विभिन्न रंगों और भावनाओं से जोड़ा गया। मंच पर बादलों की गूंज बिजली की कड़क और वर्षा की ध्वनि के बीच कलाकारों ने जल को प्रेम स्मृति और जीवन दर्शन के रूप में प्रस्तुत किया। पानी रे पानी तेरा रंग कैसा , रिमझिम गिरे सावन मोहे पनघट पे नंदलाल और अल्लाह मेघ दे पानी दे जैसे गीतों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में रहीम का प्रसिद्ध दोहा रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून भी उद्धृत किया गया। जिसने जल संरक्षण और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश दिया। प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि जल केवल संसाधन नहीं बल्कि मानव जीवन और संस्कृति की आत्मा है।







