किराना व्यापारी की मौत की दुकान! 14 साल की मासूम को खुलेआम बेचा ज़हर, प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा था मौत का धंधा

जबलपुर, यश भारत। रांझी थाना क्षेत्र अंतर्गत मानेगांव मुंडी टोरिया में रहने वाली एक 14 वर्षीय नाबालिग बालिका की ज़हर खाने से हुई मौत ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। यह सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और किराना व्यापारी की गैरकानूनी हरकत से हुई एक मासूम की मौत का मामला बनता जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बालिका सोमवार शाम घर से यह कहकर निकली थी कि वह कुछ सामान लेने जा रही है। इसी दौरान वह रांझी मुख्य मार्ग स्थित ‘पंजाब किराना स्टोर’ पहुंची, जहां से उसने घातक ज़हर खरीदा। चौंकाने वाली बात यह है कि दुकानदार ने न उसकी उम्र पूछी, न कोई पहचान पत्र मांगा और न ही यह जानने की कोशिश की कि ज़हर किस उद्देश्य से लिया जा रहा है।
रात करीब 10 बजे बालिका ने अपने घर में ही ज़हर का सेवन कर लिया। कुछ ही देर में उसकी हालत बिगड़ने लगी। पेट दर्द, उल्टी और बेचैनी के बाद परिजनों को जब शक हुआ तो उन्होंने पूछताछ की, जिस पर बालिका ने ज़हर खाने की बात बताई। घबराए परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
सूचना मिलने पर रांझी थाना पुलिस मौके पर पहुंची, शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया गया और मर्ग कायम कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान जब परिजनों ने बताया कि ज़हर पंजाब किराना स्टोर से खरीदा गया था, तब पूरा मामला और गंभीर हो गया।
किराना दुकान या मौत का लाइसेंस?
नियमों के अनुसार ज़हरीले पदार्थों की बिक्री पर सख्त प्रतिबंध है। बिना लाइसेंस, बिना रजिस्टर और बिना पहचान के किसी को भी ज़हर बेचना सीधे-सीधे अपराध है। इसके बावजूद एक सामान्य किराना दुकान पर यह घातक सामग्री खुलेआम बेची जा रही थी।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह दुकान लंबे समय से अवैध रूप से ज़हर बेच रही है और पहले भी इसकी शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन हर बार कथित तौर पर प्रशासन और संबंधित विभाग की अनदेखी के चलते मामला दबा दिया गया।
प्रशासन सोया रहा, मासूम मर गई
इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। लोगों का कहना है कि अगर किराना दुकानों पर इसी तरह मौत का सामान मिलता रहा, तो ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है:
क्या पुलिस सिर्फ मर्ग कायम कर औपचारिकता निभाएगी? या उस किराना व्यापारी पर हत्या के बराबर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी, जिसने एक नाबालिग को ज़हर बेचकर उसकी जान ले ली? यह मामला केवल आत्महत्या नहीं, बल्कि लापरवाह सिस्टम, भ्रष्ट निगरानी और गैरकानूनी व्यापार से हुई एक मासूम की संस्थागत हत्या का प्रतीक बन चुका है। अब देखना यह है कि जबलपुर प्रशासन सच में जागता है या अगली मौत का इंतज़ार करता है।







