घर से 100 मीटर दूर मछली पकड़ने गए 10 साल के मासूम का पैर फिसला, खदान के पानी से भरे गड्ढे में डूबने से मौत

घर से 100 मीटर दूर मछली पकड़ने गए 10 साल के मासूम का पैर फिसला, खदान के पानी से भरे गड्ढे में डूबने से मौत
भोपाल, यशभारत। काश! मैं उसका हाथ पकड़ पाता… यह कहते हुए 10 साल के शोएब का दोस्त सिसक पड़ता है। सोमवार सुबह रातीबड़ थाना क्षेत्र के कलखेड़ा गांव में दो मासूम बच्चे रोज की तरह घर से महज 100 मीटर दूर पानी से भरे एक गड्ढे के पास खेलने और मछली पकड़ने निकले थे। उन्हें क्या पता था कि गीली मिट्टी पर पड़ा एक गलत कदम उनकी दोस्ती और शोएब की जिंदगी का अंत कर देगा।
चीख-पुकार और बेबसी का वो मंजर
मछली पकड़ने के दौरान अचानक शोएब का पैर फिसला और वह गहरे पानी में चला गया। दोस्त को आंखों के सामने डूबता देख उसका साथी बदहवास होकर गांव की ओर दौड़ा। उसने ग्रामीणों को आवाज दी, शोएब पानी में गिर गया है, बचा लो! मासूम की पुकार सुनकर ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक पानी शांत हो चुका था। कुछ देर की तलाश के बाद शोएब का शव पानी की सतह पर तैरता मिला।
गांव में छाया सन्नाटा, परिजनों का बुरा हाल
ग्रामीणों ने बच्चे को बाहर निकाला और तुरंत पुलिस को सूचना दी। रातीबड़ पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा। सोमवार दोपहर पोस्टमार्टम के बाद जब मासूम का शव कलखेड़ा गांव पहुंचा, तो हर आंख नम हो गई। पिता इकबाल खान और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
रातीबड़ पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर रिहायशी इलाकों के पास अवैध या बंद पड़ी खदानों के खुले गड्ढों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इन गड्ढों को समय रहते भरा जाता या घेर दिया जाता, तो आज एक मासूम की जान न जाती।







