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एसडीएम का बड़ा एक्शन!: आयुष्मान कार्ड के कथित फर्जीवाड़े में 6 पर FIR, बस और प्रचार वाहन जब्त

डिंडौरी/शहपुरा। गरीब और जरूरतमंद मरीजों को गंभीर बीमारियों में मुफ्त उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित आयुष्मान भारत योजना के दुरुपयोग का कथित बड़ा मामला शहपुरा में सामने आया है। आरोप है कि निजी अस्पताल से जुड़े लोगों का एक नेटवर्क गांवों में मुनादी और पर्चे बांटकर स्वस्थ ग्रामीणों को मुफ्त इलाज का लालच देता था और फिर उनके आयुष्मान कार्ड के माध्यम से सरकारी राशि का क्लेम हासिल करने की तैयारी करता था।

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प्रशासनिक टीम ने शहपुरा विकासखंड के पिपरिया क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए ग्रामीणों को जबलपुर के सुखसागर अस्पताल ले जा रही बस और एक प्रचार वाहन को पकड़ लिया। मौके पर मिले 19 ग्रामीणों के स्वास्थ्य परीक्षण में सभी सामान्य पाए गए। मामले में चार कथित एजेंटों और दो वाहन चालकों के विरुद्ध शहपुरा थाने में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। इस कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा केवल पकड़े गए लोगों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क और अस्पताल की भूमिका तक पहुंचने की जरूरत महसूस की जा रही है।

मुनादी कराकर जुटाए ग्रामीण

प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, शहपुरा क्षेत्र के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में पिछले दो दिनों से कथित एजेंटों द्वारा पर्चे बांटे जा रहे थे और मुनादी कराकर मुफ्त इलाज के लिए लोगों को जबलपुर ले जाने का प्रचार किया जा रहा था। आरोप है कि ग्रामीणों के समग्र आईडी, पहचान पत्र और आयुष्मान कार्ड भी पहले से एकत्रित कर लिए गए थे। शनिवार सुबह करीब सात बजे 19 ग्रामीणों को बस और प्रचार वाहन के माध्यम से जबलपुर रवाना करने की तैयारी थी। इसी दौरान प्रशासनिक अमले ने दोनों वाहनों को रोककर जांच की और सभी को शहपुरा थाने पहुंचाया।

कार्रवाई के बाद बीएमओ शहपुरा की मेडिकल टीम ने मौके पर ही सभी 19 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। प्रारंभिक परीक्षण में सभी सामान्य पाए गए। किसी को भी जबलपुर रेफर किए जाने की चिकित्सकीय आवश्यकता सामने नहीं आई। प्रशासन को आशंका है कि स्वस्थ ग्रामीणों को अस्पताल में मरीज के रूप में भर्ती दिखाकर उनके आयुष्मान कार्ड और मोबाइल पर आने वाले ओटीपी के माध्यम से फर्जी क्लेम तैयार करने की योजना हो सकती थी। हालांकि, इस कथित योजना और क्लेम की वास्तविक स्थिति पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

चार एजेंट और दो वाहन चालक नामजद

तहसीलदार शहपुरा आरपी मार्को के प्रतिवेदन पर पुलिस ने छह लोगों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 0624/2026 दर्ज किया है। इनमें उमेश मिश्रा और अवधेश दुबे निवासी बरगी नगर, जबलपुर, विमल राय निवासी बरखेड़ा, शहपुरा तथा संतोष कुमार पटेल निवासी ठौठा, बरगी, जबलपुर शामिल हैं। इनके अलावा वाहन चालक संजय दुबे निवासी कालादेही, बरगी और राजा खरे निवासी रसूलिया, पाटन के नाम भी एफआईआर में शामिल हैं।

पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है।तहसीलदार के अनुसार, मौके पर पकड़े गए लोगों के पास अस्पताल का कोई अधिकृत पत्र और वाहनों के वैध दस्तावेज भी नहीं मिले। ग्रामीणों के समग्र आईडी, पहचान पत्र और आयुष्मान कार्ड से जुड़े दस्तावेजों को भी जांच के लिए जब्त किया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जबलपुर स्थित सुखसागर अस्पताल का नाम इससे पहले भी शहपुरा क्षेत्र में आयुष्मान योजना से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में सामने आ चुका है।

पहला मामला 3 जनवरी 2026 का है। शहपुरा के राछो घाट के पास मरीजों से भरी एक बस दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट गई थी। हादसे में करीब दो दर्जन लोग घायल हुए थे। बाद में जानकारी सामने आई थी कि बस रैली गांव के ग्रामीणों को उपचार के लिए जबलपुर स्थित सुखसागर अस्पताल ले जा रही थी। उस समय भी ग्रामीणों की बीमारी और अस्पताल ले जाने की आवश्यकता को लेकर सवाल उठे थे। प्रारंभिक जांच में ग्रामीण सामान्य बीमारियों से पीड़ित बताए गए थे।

दूसरा मामला 13 जनवरी 2026 के आसपास सामने आया था, जब शहपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुखसागर मेडिकल हॉस्पिटल एवं मेडिकल कॉलेज के नाम से मुफ्त मोतियाबिंद ऑपरेशन का शिविर आयोजित किया जा रहा था। आरोप था कि शिविर के लिए न तो स्वास्थ्य विभाग की अधिकृत अनुमति थी और न ही विभागीय स्वीकृति।

तत्कालीन एसडीएम ऐश्वर्य वर्मा और पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की थी। आयोजकों से अनुमति संबंधी दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया था। उस समय भी मरीजों के उपचार से ज्यादा आधार और आयुष्मान कार्ड का डाटा एकत्रित किए जाने को लेकर सवाल उठे थे।

हालांकि, उस मामले में आगे क्या जांच हुई, क्या कार्रवाई की गई और संबंधित अस्पताल अथवा जिम्मेदारों के विरुद्ध क्या निष्कर्ष निकला, इसकी स्पष्ट जानकारी अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

तीन घटनाएं, एक अस्पताल का नाम और कई अनुत्तरित सवाल

जनवरी में बस दुर्घटना, उसके बाद कथित अवैध आयुष्मान शिविर और अब अक्टूबर में 19 ग्रामीणों को लेकर जबलपुर जाने की तैयारी—इन तीनों घटनाक्रमों में सुखसागर अस्पताल का नाम सामने आने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या ग्रामीणों को गांवों से अस्पताल तक पहुंचाने के लिए बाकायदा एजेंटों और वाहनों का नेटवर्क काम कर रहा है? क्या अलग-अलग गांवों में इसी तरीके से हितग्राहियों के दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं? क्या पूर्व में इस तरह अस्पताल ले जाए गए ग्रामीणों के आयुष्मान कार्ड से क्लेम किया गया? और यदि ऐसा हुआ है तो अब तक कितनी सरकारी राशि का भुगतान हुआ है?

स्थानीय स्तर पर क्षेत्र में ऐसे करीब दस वाहनों के सक्रिय होने की बात भी सामने आई है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इन वाहनों और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण होगी।

कार्रवाई के साथ जवाबदेही भी जरूरी

शहपुरा एसडीएम फरहान इरफान जमादार के अनुसार, गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को आयुष्मान कार्ड के माध्यम से उपचार के लिए जबलपुर ले जाने की सूचना मिली थी। मौके पर कार्रवाई कर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। सभी सामान्य पाए गए हैं। चार कथित एजेंटों और दो चालकों को पुलिस के हवाले किया गया है। क्षेत्र में ऐसे करीब दस वाहनों के सक्रिय होने की जानकारी भी सामने आई है, जिसकी पुलिस से जांच कराई जा रही है।

तहसीलदार आरपी मार्को ने बताया कि भ्रमण के दौरान सूचना मिली थी कि सुखसागर मेडिकल कॉलेज के नाम पर पिपरिया में ग्रामीणों को गुमराह किया जा रहा है। मौके से 19 ग्रामीणों को ले जा रही बस, चार प्रचारकों और दो चालकों को पकड़ा गया। अस्पताल का अधिकृत पत्र और वाहनों के वैध दस्तावेज नहीं मिलने पर आरोपियों के विरुद्ध शहपुरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।

अब जरूरत केवल वर्तमान मामले में आरोपियों पर कार्रवाई करने की नहीं, बल्कि जनवरी में सामने आए दोनों पुराने मामलों की जांच की स्थिति सार्वजनिक करने की भी है। स्वास्थ्य विभाग को संबंधित अस्पताल के आयुष्मान क्लेम, भर्ती मरीजों के रिकॉर्ड, उपचार संबंधी दस्तावेज और ग्रामीणों के कार्ड से हुए लेन-देन की जांच करनी चाहिए। पुलिस को यह भी पता लगाना होगा कि ग्रामीणों के दस्तावेज किसने जुटाए, ओटीपी किसके मोबाइल पर आया और कथित क्लेम की प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल था।

आयुष्मान योजना गरीब परिवारों के लिए गंभीर बीमारी के समय जीवनरक्षक सहारा है। यदि इसी योजना के नाम पर स्वस्थ ग्रामीणों को मरीज बनाकर सरकारी राशि के कथित फर्जी क्लेम की कोशिश हो रही है, तो यह गरीबों के अधिकारों और सरकारी धन दोनों के साथ गंभीर खिलवाड़ है। अब देखना होगा कि प्रशासन की यह कार्रवाई केवल छह नामजद आरोपियों तक सीमित रहती है या जांच पुराने मामलों और पूरे कथित नेटवर्क तक भी पहुंचती है।

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