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स्वीकृत 11.32 लाख, काम सिर्फ 5.69 लाख का? : वित्तीय अनियमितता का बड़ा आरोप, ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर जताया विरोध…. देखें पूरा वीडियो

यशभारत डिंडौरी। वन मंडल डिंडौरी के अंतर्गत वन परिक्षेत्र करंजिया के वनग्राम जगतपुर में वन समिति की राशि के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। दो अलग-अलग सड़क निर्माण कार्यों में स्वीकृत राशि, वास्तविक निर्माण कार्य और खर्च को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर विरोध जताया और संबंधित वन परिक्षेत्र के अधिकारी पर शासकीय राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए जांच एवं कार्रवाई की मांग की।

ग्रामीणों के अनुसार, दोनों सड़कों के निर्माण में खर्च की गई राशि और मौके पर हुए कार्य के बीच अंतर दिखाई दे रहा है।

दो सड़क निर्माण कार्यों को लेकर उठे सवाल

ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, मुख्य मार्ग से कपटी टोला तक सड़क निर्माण कार्य के लिए 4 लाख 66 हजार रुपये की राशि स्वीकृत बताई गई है। ग्रामीणों का दावा है कि मौके पर हुए कार्य पर लगभग 1 लाख 88 हजार रुपये ही खर्च हुए हैं, जबकि पूरी स्वीकृत राशि के आहरण की बात कही जा रही है। इस अंतर को लेकर ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, वास्तविक लागत और राशि के उपयोग की जांच कराने की मांग की है।

इसी प्रकार, मोहन के घर से देवनाथ के घर तक सड़क निर्माण कार्य के लिए 6 लाख 66 हजार रुपये की राशि स्वीकृत होने की जानकारी दी गई है। ग्रामीणों के अनुसार, इस सड़क पर लगभग 3 लाख 81 हजार रुपये का ही वास्तविक कार्य हुआ है, जबकि पूरी स्वीकृत राशि के आहरण का दावा किया जा रहा है। ग्रामीणों ने दोनों निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन कराकर वास्तविक खर्च और भुगतान की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

वन मंडलाधिकारी तक पहुंचा मामला

वन समिति की राशि के उपयोग को लेकर उठे सवालों के बाद मामला वन मंडलाधिकारी तक पहुंच गया है। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच कराने, स्वीकृत राशि के विरुद्ध हुए कार्यों का आकलन करने तथा भुगतान और खर्च से संबंधित अभिलेखों की जांच करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

10 दिन में जांच का आश्वासन

जिला मुख्यालय में विरोध के दौरान संबंधित जिला अधिकारी ने ग्रामीणों को 10 दिन के भीतर मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। अब ग्रामीणों की नजर जांच की प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों पर टिकी है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि दोनों सड़क निर्माण कार्यों पर वास्तव में कितनी राशि खर्च हुई, कितना भुगतान किया गया और निर्माण कार्य स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप हुआ या नहीं।

फिलहाल, ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। मामले में विभागीय जांच और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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