रसीद गायब, ब्याज बेलगाम: माइक्रोफाइनेंस के ‘मायाजाल’ में फंसीं ग्रामीण महिलाएं धरने पर बैठीं

मण्डला। जिले में संचालित माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की कथित मनमानी और कर्ज वसूली के विरोध में महिलाओं का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। कलेक्ट्रेट रोड पर सैकड़ों महिलाएं पिछले सात दिनों से दिन-रात धरने पर बैठी हैं। बारिश के बीच मुख्य सड़क किनारे और उद्यानिकी विभाग की बाउंड्री के पास चल रहा यह धरना अब प्रशासन के लिए भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। महिलाओं की प्रमुख मांग कर्ज माफी, माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की जांच और कथित मनमानी वसूली पर तत्काल रोक लगाने की है।
सात दिन से सड़क पर महिलाएं, प्रशासन की नजर अब तक नहीं
धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि माइक्रोफाइनेंस कंपनियों ने उनकी आर्थिक स्थिति और आय के स्थायी स्रोत की पर्याप्त जांच किए बिना उन्हें अलग-अलग समूहों में कर्ज बांट दिया। शुरुआत में छोटी-छोटी जरूरतों के लिए लिया गया यह कर्ज अब उनके लिए परेशानी का बड़ा कारण बन गया है। महिलाओं का आरोप है कि मूल राशि का बड़ा हिस्सा चुकाने के बाद भी ब्याज और अन्य राशि के नाम पर लगातार वसूली का दबाव बनाया जा रहा है।
महिलाओं के अनुसार, कई बार कंपनी के एजेंट घर पहुंचकर किस्त जमा करने के लिए दबाव बनाते हैं। धरने पर मौजूद महिलाओं ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में एजेंटों द्वारा अभद्र भाषा का इस्तेमाल, गाली-गलौज और मारपीट तक की गई। महिलाओं का यह भी आरोप है कि कई बार सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का दबाव बनाया जाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जमा राशि की रसीद नहीं देने का भी आरोप
महिलाओं ने माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई बार किस्त की राशि जमा करने के बाद भी उन्हें भुगतान की रसीद नहीं दी जाती। उनका कहना है कि लगातार बढ़ते वसूली दबाव के कारण गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवार आर्थिक और मानसिक परेशानी से गुजर रहे हैं।
धरने पर बैठी महिलाओं ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि माइक्रोफाइनेंस एजेंटों के कथित दबाव और डर के कारण कुछ महिलाएं अपना घर छोड़कर चली गईं और उनके बारे में परिजनों को भी जानकारी नहीं है। महिलाओं ने प्रशासन से ऐसे मामलों की भी जांच कराने की मांग की है।
“जिले से बाहर हों कर्ज बांटने वाली कंपनियां
धरने का नेतृत्व कर रही सेवती, विनीता मरावी, सियावती, गंगा बाई, सेवकली, सिया बाई परते, ममता, सुनीता, संतिया, पुसिया, यशोदा, बबली, गंगा, बिस्तो, मेमवती, फूलवती, सुनीता, कलिया बाई, कोकड़िया सहित निंधानी, सानी मोहगांव, कुड़ादेवरी और चीचगांव क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं ने अपनी मांगें रखी हैं।
महिलाओं की मांग है कि जिले में कर्ज बांट रही माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की गतिविधियों की जांच कराई जाए। यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित कंपनियों पर कार्रवाई की जाए और उन्हें जिले से बाहर किया जाए। साथ ही महिलाओं के कर्ज को माफ करने की मांग भी लगातार उठाई जा रही है।
मांगें नहीं मानीं तो भूख हड़ताल की चेतावनी
महिलाओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। महिलाओं का कहना है कि अनिश्चितकालीन धरने के बाद भूख हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया जा सकता है।
सात दिन गुजर जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई प्रतिनिधि धरना स्थल पर नहीं पहुंचने का आरोप लगाते हुए महिलाओं ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि वे बारिश और सड़क किनारे की असुविधाओं के बीच अपनी मांगों को लेकर डटी हुई हैं, लेकिन उनकी समस्या सुनने के लिए जिम्मेदार अधिकारी अब तक सामने नहीं आए हैं।
धरने को दिया समर्थन
बुधवार को समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता धरना स्थल पहुंचे। अब्दुल कय्यूम अंसारी, श्यामलाल झारिया, गुलजार सिंह मरकाम, पी.डी. खैरवार, कन्हैया पटैल, मंगल सिंह उईके, गोविंद धुर्वे और करम सिंह उईके सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने महिलाओं की मांगों का समर्थन किया।
इसके अलावा क्षेत्रीय जनपद सदस्य हरेंद्र मसराम, सहजान परस्ते, सुखदेव मरावी सहित समाजसेवियों का दल भी धरना स्थल पहुंचा और महिलाओं से चर्चा कर उनके आंदोलन को समर्थन दिया।







