
जबलपुर, यश भारत। सुप्रीम कोर्ट से जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केन्द्रों में कार्यरत वैज्ञानिकों और कर्मियों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की डिवीजन बेंच ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) से कहा है कि जब कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिक और कर्मियों को वेतन के साथ अन्य सेवा लाभ दिए जाने की अंडरटेकिंग हाईकोर्ट में दी गई है तो इसका पालन करना होगा।
उल्लेखनीय है कि जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय सहित देश के अन्य कृषि विज्ञान केन्द्रों में कार्यरत वैज्ञानिकों और कर्मिचारियों को आईसीएआर वेतन के साथ अन्य सेवा लाभ भी देता था। आईसीएआर ने पांच साल पहले वेतन के साथ मिलने वाले डीए,एचआरए, पेंशन अंशदान जैसे अन्य सेवा लाभ का भुगतान करना बंद कर दिया। वैज्ञानिकों और कर्मियों ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आईसीएआर के आदेश पर रोक लगा दी। इसके बाद भी जब भुगतान शुरू नहीं किया गया तो अवमानना याचिका दायर की गई। अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान आईसीएआर ने अंडरटेकिंग दी थी कि वैज्ञानिकों और कर्मियों को वेतन के साथ अन्य सेवा लाभ भी दिए जाएंगे। इसके बाद भुगतान भी शुरू कर दिया गया। भुगतान शुरू होने के बाद अवमानना याचिका वापस ले ली गई। जनवरी 2026 से आईसीएआर ने फिर से वेतन के साथ अन्य लाभों का भुगतान रोक दिया। भुगतान रोके जाने पर वैज्ञानिकों और कर्मियों की ओर से हाईकोर्ट में फिर से अवमानना याचिका दायर कर दी गई। इसके जवाब में आईसीएआर की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर दी गई। गुरुवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि आईसीएआर को वैज्ञानिको और कर्मियों को वेतन के साथ अन्य लाभ दिए जाने की अंडरटेकिंग का पालन करना होगा। वैज्ञानिको और कर्मियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा और वरिष्ठ अधिवक्ता अर्पण पवार ने पक्ष प्रस्तुत किया।







