मझगवां में फिर सड़ रही सरकारी धान
करोड़ो का नुकसान, जिम्मेदार चुप

मझगवां में फिर सड़ रही सरकारी धान

बोरियों से निकले अंकुर, आम जनता के पैसों की बर्बादी का जवाबदार कौन?
करोड़ों के पुराने नुकसान के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था, पानी और कीचड़ में मिली बोरियां; कितना अनाज आया, कितना बचा—जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल
कटनी, यशभारत। मझगवां,बड़वारा एवं मझगवाँ रीठी रोड स्थित सरकारी ओपन कैप में एक बार फिर सरकारी धान की बदहाली सामने आई है। सामने आए वीडियो में बारिश के पानी से भीगी धान की बोरियां दिखाई दे रही हैं। कई बोरियों में धान अंकुरित हो चुकी है, जबकि कुछ धान पानी और कीचड़ के बीच पड़ी नजर आ रही है। सवाल सिर्फ अनाज के खराब होने का नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की सरकारी उपज के रखरखाव और निगरानी व्यवस्था का है।
मझगवां में धान की बर्बादी का यह पहला मामला नहीं है। मध्यप्रदेश विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2019-20 में मझगवां फाटक ओपन कैप में 2,79,348.90 क्विंटल धान क्षतिग्रस्त हुई थी। इसकी संभावित कीमत 50 करोड़ 70 लाख 18 हजार 253 रुपये बताई गई थी। सरकारी जवाब में धान की समय पर मिलिंग नहीं होने और लंबे समय तक भंडारित रहने को नुकसान का कारण बताया गया था।
इसके बाद वर्ष 2023 में भी मझगवां ओपन कैप से जुड़े मामले ने गंभीर सवाल खड़े किए थे। करीब सात करोड़ रुपये मूल्य की धान के खराब होने और खुर्द-बुर्द होने के मामले में चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी। वहीं विधानसभा के एक अन्य जवाब में मझगवां ओपन कैप में भंडारित धान में 5,411 टन की कमी का उल्लेख किया गया था।
पुराना अनुभव, फिर भी बारिश में भीगती धान
इतने बड़े पुराने नुकसान और मामलों के बाद भी यदि मौजूदा बारिश में सरकारी धान की बोरियां पानी में भीगती और अंकुरित होती दिखाई दे रही हैं, तो यह व्यवस्था की निगरानी पर बड़ा सवाल है। आखिर बारिश से पहले भंडारित अनाज को सुरक्षित रखने के लिए क्या इंतजाम किए गए थे? नियमित निरीक्षण हुआ तो जिम्मेदारों को धान की यह स्थिति नजर क्यों नहीं आई?
सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद वेयरहाउस प्रबंधन हरकत में आया। जानकारी के अनुसार बेयर हाउस मैनेजर रामावतार मिश्रा तथा आर एम जबलपुर संतोष सोलंकी ने मझगवां स्थित ओपन कैप का निरीक्षण कर मौके की स्थिति की जानकारी ली है। हालांकि इस संबंध में अधिकारियों से यशभारत का संपर्क नहीं हो सका।
कितनी धान आई, कितनी बची—आंकड़े बताने से क्यों बच रहे जिम्मेदार?
मामले में सबसे अहम सवाल अब भंडारित धान की वास्तविक मात्रा को लेकर है। यहां कुल कितने टन धान रखी गई थी, वर्तमान में कितनी मात्रा सुरक्षित है और कितनी खराब या कम पाई गई—इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। सूत्रों का दावा है कि ओपन कैप में रखी धान की बड़ी मात्रा गायब होने की भी आशंका है। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे स्टॉक का भौतिक सत्यापन और रिकॉर्ड से मिलान जरूरी हो गया है।
जिला प्रबंधक योगेंद्र सिंह सेंगर के अनुसार मझगवां का काम शाखा स्तर पर देखा जाता है। वहीं शाखा प्रबंधक सत्येंद्र प्रजापति से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
अब सवाल यह है कि बारिश में भीगकर अंकुरित हो रही धान की वास्तविक मात्रा कितनी है? स्टॉक में कितना अंतर है? और यदि नुकसान हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? पुराने करोड़ों के नुकसान के बाद मझगवां में फिर वही तस्वीर सामने आना इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और मौके पर स्टॉक सत्यापन की जरूरत को और गंभीर बना देता है।







