किसानों की जमीन के नाम पर सरकारी मूंग खरीदी का खेल – फर्जी पंजीयन कर सस्ती मूंग समर्थन मूल्य पर बेची, तीन पर केस दर्ज

किसानों की जमीन के नाम पर सरकारी मूंग खरीदी का खेल
– फर्जी पंजीयन कर सस्ती मूंग समर्थन मूल्य पर बेची, तीन पर केस दर्ज
भोपाल, यश भारत। समर्थन मूल्य पर मूंग उपार्जन की व्यवस्था में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला रायसेन जिले में सामने आया है। किसानों की जमीन का फर्जी तरीके से पंजीयन कराकर खुले बाजार से कम कीमत पर खरीदी गई घटिया मूंग को सरकारी उपार्जन केंद्रों पर समर्थन मूल्य में बेच दिया गया। मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने 8 सितंबर 2026 को अपराध क्रमांक 95/2026 दर्ज कर रंजीत ठाकुर, श्रीराम ठाकुर, गौरव ठाकुर समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
ऑपरेटरों से लेते थे किसानों की जमीन की जानकारी
जांच में सामने आया कि आरोपी ऐसे किसानों की जमीन को निशाना बनाते थे, जिन्होंने उपार्जन समितियों में मूंग बेचने के लिए पंजीयन नहीं कराया था। आरोप है कि उपार्जन केंद्रों पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटरों के पास ऐसे किसानों की जानकारी रहती थी। इसी जानकारी का इस्तेमाल कर अधिकारियों-कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से जमीन का पंजीयन आरोपियों या उनके परिचितों के नाम पर कराया गया।
किसानों को भनक तक नहीं लगी
जांच में यह भी सामने आया कि पंजीयन पर्ची के कॉलम-5 में वास्तविक जमीन मालिक या कौलीदार का नाम दर्ज करने के बजाय आरोपियों ने खुद को सिकमीदार यानी बटाईदार के रूप में दर्ज करा लिया। इसके लिए संबंधित किसानों से न तो कौलीनामा लिया गया और न ही उनकी सहमति। कई किसानों को उनकी जमीन के नाम पर हुए पंजीयन और उस जमीन से सरकारी केंद्र पर मूंग बेचने की जानकारी तक नहीं थी। एक किसान की करीब डेढ़ एकड़ जमीन दूसरे व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत की गई। वहीं एक अन्य किसान की पत्नी और बहू के नाम दर्ज करीब ढाई एकड़ जमीन के कई पंजीयन अलग-अलग लोगों के नाम पर किए गए। एक अन्य मामले में किसान की पत्नी के नाम की करीब पौने दो एकड़ जमीन का भी कथित तौर पर फर्जी पंजीयन किया गया। इन पंजीयनों में दर्ज बैंक खाते भी संबंधित किसानों के नहीं थे।
तीन हजार से कम में मूंग खरीदी, समर्थन मूल्य पर बेची
ईओडब्लयू मुताबिक आरोपियों ने स्थानीय व्यापारियों और बरेली मंडी से घटिया किस्म की मूंग 3 हजार रुपए प्रति क्विंटल से कम कीमत में खरीदी। इसके बाद इसी मूंग को सरकारी उपार्जन केंद्रों पर समर्थन मूल्य पर बेचकर बड़ा मुनाफा कमाया गया।
मूंग का समर्थन मूल्य वर्ष 2024-25 में 8,558 रुपए और वर्ष 2025-26 में 8,682 रुपए प्रति क्विंटल था। यानी बाजार से कम कीमत पर खरीदी गई मूंग को सरकारी खरीद व्यवस्था में कई गुना अधिक कीमत पर बेचने का आरोप है।
श्रीराम को 8.60 लाख का अनुचित लाभ
जांच के अनुसार श्रीराम ठाकुर ने अपने नाम पर दो पंजीयन के जरिए 151.524 क्विंटल मूंग बेची। इसके बदले उसे शासन से करीब 13.15 लाख रुपए मिले, जबकि मूंग की खरीद पर लगभग 4.54 लाख रुपए खर्च किए गए। इस तरह उसे करीब 8.60 लाख रुपए का अनुचित लाभ होने की बात सामने आई है।
रंजीत ठाकुर ने 42.276 क्विंटल मूंग बेचकर 3.67 लाख रुपए प्राप्त किए और करीब 2.40 लाख रुपए का अनुचित लाभ कमाया। वहीं गौरव ठाकुर ने 41.136 क्विंटल मूंग बेचकर 3.57 लाख रुपए हासिल किए। उसके हिस्से में करीब 2.33 लाख रुपए का अनुचित लाभ आया। तीनों आरोपियों से जुड़े मामलों में शासन को करीब 13.35 लाख रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचने का अनुमान है। मामले में फर्जी पंजीयन, उपार्जन प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका को लेकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।







