कटनी

कटनी कम्प्यूटर्स मामले में हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पण, जांच में गंभीर खामियां मिलने पर आरोपी को जमान, ऑनलाइन गेमिंग और फर्जी लेनदेन जुड़ा है मामला

कटनी, यशभारत। मप्र हाईकोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग और करोड़ों रुपए के फर्जी लेनदेन से जुड़े मामले में कटनी पुलिस की जांच पर सवाल खड़े किए हैं। जस्टिस रामकुमार चौबे की सिंगल बेंच ने इस मामले में मुख्य लोगों से पूछताछ नहीं किए जाने पर हैरानी जताई है। हाईकोर्ट ने डीजीपी को मामले की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी योगेश बजाज को जमानत दे दी है। आरोपी के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने धारा 318 (4), 319 (2) तथा धारा 4 (क) के तहत मामला दर्ज किया था। आदेश के अनुसार योगेश 17 अप्रैल से न्यायिक हिरासत में था। अभियोजन के अनुसार शिकायतकर्ता ओमप्रकाश ने 30 मार्च को कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि कि वह लंबे समय से विजय भैरवानी के स्वामित्व वाली कटनी कंप्यूटर्स में काम करता था। उसका संपर्क वहां काम करने वाले सह आरोपी हिमांशु से हुआ। हिमांशु ने कथित रूप से उसे कटनी कॉम्प नाम से फर्म खोलने का आश्वासन दिया और इसके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड व फोटो लिए। इसके बाद ओमप्रकाश के नाम पर बैंक में खाता खोला गया। ओमप्रकाश से खाली हस्ताक्षरित चेक लिए गए और ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े कथित लेनदेन के लिए उस बैंक खाते का इस्तेमाल किया गया। इसी खाते का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े बड़े वित्तीय लेनदेन के लिए किया गया। पुलिस ने इस मामले में योगेश बजाज सहित अन्य लोगों को आरोपी बनाया था। कोर्ट के सामने पेश बैंक रिकॉर्ड में ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े 11.94 करोड़ रुपए के लेनदेन का पता चला। यह रकम कटनी कम्प्यूटर्स के मालिक विजय भैरवानी और उनके कर्मचारियों के बैंक खातों में पहुंची थी।
बचाव पक्ष ने जांच पर उठाए सवाल
आरोपी की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि उसे मामले में झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने कहा कि कथित ऑनलाइन गेमिंग से प्राप्त राशि आवेदक के बैंक खाते में जमा होने का कोई प्रमाण नहीं है और किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर बैंक खाता खुलवाने में भी आवेदक की कोई भूमिका नहीं थी। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध बैंक खाता विवरण से यह सामने आता है कि कटनी कंप्यूटर्स के नाम से संचालित खातों तथा कटनी कंप्यूटर्स के कर्मचारियों के बताए गए कुछ अन्य व्यक्तियों के खातों में पर्याप्त राशि प्राप्त हुई थी। अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि जांच एजेंसी ने उन व्यक्तियों से पूछताछ नहीं की, जिनके खातों में बड़ी रकम जमा हुई थी। कटनी कंप्यूटर्स के मालिक विजय भैरवानी का बयान भी दर्ज नहीं किया गया था। आदेश में यह भी कहा गयाह कि बैंक खाता विवरण उपलब्ध होने के बावजूद जांच एजेंसी द्वारा संबंधित लेनदेन की पड़ताल नहीं की गई। हाईकोर्ट ने मामले की जांच को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए आदेश की प्रति डीजीपी को भेजने के निर्देश दिए।
25 लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत
मामले के तथ्यों, आरोपी की भूमिका, उपलब्ध साक्ष्यों, बैंक खाते में कथित राशि जमा नहीं होने, जांच में सामने आई कमियों तथा 17 अप्रैल से न्यायिक हिरासत में रहने के तथ्य को देखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी योगेश बजाज को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने उसे 25 लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का निर्देश दिया। आदेश में 50 हजार रुपये की एक सक्षम जमानत का भी प्रावधान किया गया है।

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