कटनी

ऑटो-ई-रिक्शा की धमाचौकड़ी, यातायात व्यवस्था चौपट, जहां मर्जी वहां वाहन खड़ा कर उतारने लगते हैं सवारियां, कदम-कदम पर लग रहा जाम

कटनी, यशभारत। ऑटो और ई-रिक्शा की लगातार बढ़ती संख्या शहर की यातायात व्यवस्था के लिए गंभीर संकट बन गई है। विशेष रूप से इलेक्ट्रिक ऑटो के बढ़ते चलन ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इन ऑटो रिक्शा का न तो कोई निश्चित रूट है और न ही इनकी पार्किंग के लिए कोई नियम लागू हैं, जिसके कारण शहर की सडक़ों पर हर समय जाम की स्थिति बन रही है। शहर के अधिकांश सडक़ हादसों के लिए इन ऑटो चालकों की मनमानी और अव्यवस्थित चलने की आदत जिम्मेदार बताई जा रही हैए जो 60 फीसदी दुर्घटनाओं का कारण बनती है। सबसे अधिक समस्याएं ई-ऑटो रिक्शा वालों से उत्पन्न हो रही हैं, जो ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अपनी मनमानी तरीके से सडक़ों पर दौड़ते हैं। शहर में ऑटो और ई-रिक्शा की स्थिति पूरी तरह अव्यवस्थित है, जहां चालक केवल सवारी को प्राथमिकता देते हैं। इस कारण वे अक्सर अपने वाहन को बीच सडक़ पर खड़ा कर देते हैं या सवारी दिखते ही वहीं रुक जाते हैं, जिससे जाम की स्थिति उत्पन्न होती है। चौराहों पर लेफ्ट टर्न पर भी ऑटो खड़े करके सवारी का इंतजार करते हैं, जिससे दुर्घटनाएं भी होती हैं। शहर की सडक़ों पर ऑटो रिक्शा चालकों की मनमानी और अव्यवस्थित ड्राइविंग अक्सर हादसों का कारण बन रही है। इन चालकों की रफ्तार को देखकर ऐसा लगता है कि वे किसी को भी आगे बढऩे नहीं देना चाहते। इलेक्ट्रिक ऑटो में तो नाबालिग बच्चों की भी भारी संख्या देखने को मिलती है, जो कभी एक पांव आगे करके तो कभी पालथी मार कर वाहन चला रहे होते हैं। कई चालक तो नशे की हालत में ऑटो चला रहे होते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है। इन चालकों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे अचानक सवारी देखते ही बिना सिग्नल दिए रोड पर मोड़ लेते हैं, जिससे पीछे आ रहे वाहन चालकों को कोई अनुमान नहीं होता कि ऑटो कहां जाएगा या कहां रुकेगा। इसके कारण सडक़ पर जाम और दुर्घटनाओं की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
रूट निर्धारित लेकिन पालन नहीं
शहर को जाम से निजात दिलाने के लिये पुलिस व प्रशासन स्तर पर ऑटो चालकों का रूट निर्धारण किया गया था। करीब दो साल पहले यह व्यवस्था बनाई गई थी, लेकिन आज तक इसका पालन नहीं हो पाया। यदि ऑटो चालक अपने निर्धारित रूट पर चलने लगे तो जाम की समस्या से काफी राहत मिल जायेगी। समय समय पर ऑटो चालकों को नियम का पाठ तो पढ़ाया जाता है लेकिन मनमर्जी के मालिक ऑटो चालकों को इससे क्या ण्ण्ण्! उन्हें तो चालानी कार्रवाई का भी नहीं रह गया खौफ गया ।
ऐसा कोई मार्ग नहीं, जहां जाम न मिले
शहर का शायद ही कोई ऐसा मार्ग हो जहां पर दिन में जाम न लगता हो। सबसे ज्यादा समस्या कोतवाली तिराहा चौराहा, अस्पताल मार्ग, सुभाष चौक, झंडा बाजार, गोलबाजार, गर्ग चौराहा, सराफा, घन्टाघर, आजाद चौक, मिशन चौक ये शहर के मुख्य मार्ग हैं। इन्हीं मार्गों से लोग कचहरी, अस्पताल, कलेक्ट्रेट न्यायालय एवं तक पहुंचते हैं। लेकिन दिन के समय में इन मार्गों से गुजरने में लोगां को भीषण जाम का सामना करना पड़ता है। कई बार ऐसा होता है 5 मिनट की दूरी कवर करने में लोगों को आधे घंटे से ज्यादा का समय लग जाता है। पुलिस बार बार हिदायत देती है की स?क पर यदि सवारी उतारे व बैठाते हैं तो सख्त कार्रवाई की जायेगी। लेकिन इस हिदायद का कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। मसलन जाम की समस्या शहर के हर मार्ग में दिन भर बनी रहती है।
इनका कहना है
शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में अंदरूनी मार्गों से लेकर मुख्य मार्गों में सभी के सहयोग से व्यवस्थाएं बनाई जा रही है। जल्द ही इस पर अमल होगा और यातायात व्यवस्था में सुधार देखने को मिलेगा।
-अनूप सिंह ठाकुर, थाना प्रभारी यातायात

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