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10 घंटे बिजली का दावा, फाल्ट-ट्रिपिंग ने घटाई सप्लाई, किसानों का कहना- सोने के वक्त रात में मिलती है बिजली

कटनी, यशभारत। कहने को तो 10 घंटे निरंतर बिजली दिए जाने की बात हो रही है लेकिन हकीकत अलग है। 10 घंटे की अवधि के बीच फाल्ट व ट्रिपिंग होती है। फाल्ट की निश्चित अवधि नहीं है जबकि ट्रिपिंग कुछ सेकंड की भी हो सकती है। इसके अलावा अचानक उपकरणों में खराब आने के कारण भी बिजली बंद की जाती है। यदि ये तीनों स्थिति 10 घंटे की अवधि के बीच बनती है तो सुधार होने की अवधि तक बंद होने वाली बिजली की भरपाई नहीं की जा रही है।

किसानों का कहना है कि 10 घंटे बिजली पर आरोप-प्रत्यारोप के बीच जमीनी हकीकत से सिस्टम पूरी तरह वाकिफ नहीं है। मैदान में आकर उनकी मुश्किलों को दूर करने के असल उपाए होने अब भी बाकी है। 10 घंटे की अवधि के बीच कई बार बिजली गुल होती है। इसकी वजह अचानक फाल्ट, ट्रिपिंग व उपकरणों में खराबी आना बताया जाता है। भरपूर बिजली होने के दावों के बीच किसानों का कहना है कि उन्हें 10 घंटे बिजली का बड़ा हिस्सा रात में दिया जाता है, इसलिए रात में खेतों में रहना पड़ता है। कई तरह की परेशानियों के बीच खेतों में रहना मुश्किल होता है, क्योंकि पहले की तुलना में चुनौतियां बढ़ी है। पहले गांवों में बीमारियां बहुत कम थीं, अब कई तरह की शारीरिक समस्याएं किसानों को घेर रही है।

इनका कहना है

10 घंटे की अवधि के बीच में कई बार बिजली बंद होती है, जिसकी बाद में भरपाई होनी चाहिए जो कि नहीं की जा रही है। कई बार अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं। पुनः इस संबंध में वरिष्ठ स्तर पर बात करेंगे। ताकि किसानों को सुविधा मिले।

– विजय यादव, किसान

ट्रिपिंग को गिना जाए

10 घंटे की अवधि के बीच होने वाले फाल्ट, ट्रिपिंग, उपकरणों में आने वाली खराबी को गिना जाए और इन तीनों कारणों के चलते जितने समय तक बिजली बंद रहती है, उसकी आपूर्ति अलग से की जाए। अभी ऐसा नहीं हो रहा है। इसे भी सप्लाई ऑवर में जोड़ते हैं।

भगवती पटेल, किसान

ये है किसानों की समस्या का कारण

फाल्ट और ट्रिपिंगः पुराने बिजली फीडरों, कमजोर ट्रांसफार्मरों और ओवरलोड से लाइन बार-बार ट्रिप होना।

तकनीकी खराबीः सिंचाई के सीजन में ट्रांसफार्मर और तारों पर अतिरिक्त दबाव से बार-बार फाल्ट बनते हैं।

असमय आपूर्तिः बिजली रात में दी जा रही है, जिससे किसानों को प्रतिकूल मौसम में खेतों में रहना पड़ता है।

निरीक्षण की कमीः अफसर फील्ड में नहीं जाते, जिससे वास्तविक स्थिति समझ से बाहर रहती है।

ऐसे मिलेगी राहत

ट्रिपिंग का हिसाबः 10 घंटे की सप्लाई में जितनी देर बिजली बाधित हो, उतनी अवधि की भरपाई की जाए।

फीडर सुधारः ग्रामीण फीडरों और ट्रांसफार्मरों की नियमित जांच व रखरखाव हो।

दिन में सप्लाई: किसानों को रात के बजाय दिन में बिजली देने की व्यवस्था हो, ताकि उत्पादकता दोनों बढ़ें। गांवों में जाकर अमला वास्तविक समस्याएं देखें।

समन्वय बैठकेंः किसानों के साथ विभाग का नियमित संवाद स्थापित हो।IMG 20260602 WA0421

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