जबलपुरमध्य प्रदेश

रिंग रोड की चमक के पीछे जमीनों का काला खेल,आदिवासी परिवारों की जमीनों पर सौदेबाजी, लाखों की रजिस्ट्री के बदले मिले चंद रुपए

एसडीएम बोले- मैं स्वयं मौके पर जाकर करुंगा निरीक्षण, होगा नो टॉलरेंस एक्शन

जबलपुर। शहर में निर्माणाधीन देश की चौथी सबसे बड़ी रिंग रोड परियोजना अब विकास से ज्यादा विवादों के कारण चर्चा में है। पनागर, पाटन और बरगी क्षेत्र में आदिवासी एवं कोल परिवारों की जमीनों को लेकर बड़े स्तर पर गड़बड़ी और कथित धोखाधड़ी के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि जिन जमीनों को शासन ने गरीब आदिवासी परिवारों को जीविकोपार्जन और खेती के लिए दिया था, उन्हीं जमीनों की अब करोड़ों के सौदे किए जा रहे हैं। दस्तावेजों में लाखों रुपए का भुगतान दिखाया गया, लेकिन जमीन मालिकों का कहना है कि उन्हें वास्तविक राशि का बेहद छोटा हिस्सा ही मिला।Screenshot 20260524 213707 ChatGPT

रिंग रोड बनने से अचानक बढ़े जमीनों के दाम-रिंग रोड परियोजना की घोषणा के बाद आसपास के ग्रामीण इलाकों की जमीनें अचानक बेहद कीमती हो गईं। जिन खेतों की पहले सामान्य कीमत थी, अब वहीं जमीनें लाखों और करोड़ों में बिक रही हैं। इसी बढ़ती कीमत का फायदा उठाकर भू-माफिया और बिचौलिए सक्रिय हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भोले-भाले आदिवासी परिवारों को बहला-फुसलाकर उनकी जमीनें हड़पी जा रही हैं।

“37 लाख की रजिस्ट्री, हाथ में सिर्फ 5 लाख”file 00000000c6047207b75769ba821e288b

मंझगवां क्षेत्र की एक आदिवासी महिला ने आरोप लगाया कि उसकी जमीन की रजिस्ट्री करीब 37 लाख रुपए में की गई, लेकिन उसे सिर्फ 5 लाख रुपए ही दिए गए। महिला का कहना है कि उसे सौदे की वास्तविक रकम और दस्तावेजों की पूरी जानकारी तक नहीं दी गई। रजिस्ट्री में बैंक ट्रांजेक्शन दर्ज होने के बावजूद पीड़ित परिवार अब भी पूरी रकम मिलने का इंतजार कर रहा है।

दूसरे परिवार ने भी लगाए रकम रोकने के आरोपScreenshot 20260524 213811 ChatGPT

इसी तरह एक अन्य कोल परिवार ने आरोप लगाया कि उनकी जमीन 33 लाख 40 हजार रुपए में बेची गई, लेकिन पूरी राशि उन्हें नहीं मिली। दस्तावेजों में अलग-अलग बैंकों से आरटीजीएस ट्रांजेक्शन दिखाए गए, लेकिन परिवार का कहना है कि बड़ी रकम बीच में ही रोक ली गई। बाद में उन्हीं पैसों से दूसरी जगह जमीन खरीदने की एंट्री दस्तावेजों में दिखाई गई।Screenshot 20260524 213735 ChatGPT

सरकारी और अहस्तांतरणीय जमीनों के सौदों पर उठे सवाल-मामले में सबसे बड़ा सवाल उन जमीनों को लेकर उठ रहा है जिन्हें शासन ने आदिवासी परिवारों को खेती और गुजर-बसर के लिए आवंटित किया था। नियमों के अनुसार ऐसी जमीनें “अहस्तांतरणीय” श्रेणी में आती हैं, यानी उन्हें बेचा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद इन जमीनों की रजिस्ट्रियां और सौदे होने से पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।Screenshot 20260524 213711 ChatGPT

“रिंग रोड के नाम पर सक्रिय है बड़ा नेटवर्क”-स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि रिंग रोड परियोजना के आसपास जमीन कब्जाने के लिए एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है। इस नेटवर्क में बिचौलिए, जमीन कारोबारी और कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका होने की आशंका जताई जा रही है। आरोप है कि गरीब परिवारों को कम जानकारी और आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर सौदे कराए जा रहे हैं।

एसडीएम अभिषेक सिंह ने कहा-होगी सख्त कार्रवाईScreenshot 20260524 214045 ChatGPT

मामले पर जबलपुर एसडीएम अभिषेक सिंह ने कहा कि अभी लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है परंतु आने वाले दिनों में अगर कोई शिकायत सामने आएगी तो सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी अभी मीडिया बंधुओ से प्राप्त जानकारी के अनुसार कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। कुछ रजिस्ट्रियों में बड़ी रकम दर्ज है, जबकि जमीन मालिकों को बेहद कम राशि मिलने की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जमीनें अहस्तांतरणीय श्रेणी की हैं तो मामला गंभीर है। पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जाएगी और वे स्वयं मौके का निरीक्षण करेंगे।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहे बड़े सवाल-इस पूरे मामले ने राजस्व विभाग, रजिस्ट्री प्रक्रिया और प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि जमीनें शासन द्वारा सुरक्षित श्रेणी में थीं तो आखिर उनकी रजिस्ट्री कैसे हो गई। वहीं पीड़ित परिवारों ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग की है।

जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें-रिंग रोड परियोजना से जुड़े इस कथित जमीन घोटाले ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला जबलपुर के सबसे बड़े जमीन घोटालों में शामिल हो सकता है।

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