पंचायत की राजनीति में खून की होली, पोस्टर विवाद से आधी रात को दहला सोहरौना
पोस्टर फाड़ने पर भड़की खूनी जंग, धारदार हथियार से हमला, दो युवक जिंदगी और मौत से जूझ रहे

पंचायत की राजनीति में खून की होली, पोस्टर विवाद से आधी रात को दहला सोहरौना
पोस्टर फाड़ने पर भड़की खूनी जंग, धारदार हथियार से हमला, दो युवक जिंदगी और मौत से जूझ रहे
कुशीनगर। शनिवार की रात गांव में सन्नाटा था, लेकिन चुनावी पोस्टरों पर चली उंगलियों ने ऐसा तूफान खड़ा कर दिया कि कुछ ही मिनटों में दरवाजा रणभूमि बन गया। पहले तंज उछले, फिर जुबानें भिड़ीं और देखते ही देखते धारदार हथियार चमक उठा। खून से लथपथ दो युवक जमीन पर तड़पते रहे, जबकि पूरा सोहरौना गांव दहशत और तनाव की आग में जल उठा। पंचायत चुनाव की दस्तक ने रामकोला के इस गांव में ऐसा खूनी खेल दिखाया, जिसने आधी रात को ही पूरे इलाके की नींद उड़ा दी।
घटना के बाद गांव में चीख-पुकार, भगदड़ और दहशत का माहौल बन गया। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को रात में ही गांव को छावनी में तब्दील करना पड़ा।
बताया जा रहा है कि गांव रामकोला थानान्तर्गत सोहरौना गांव के निवासी अशोक तिवारी आगामी पंचायत चुनाव में बीडीसी सदस्य पद पर अपना किस्मत आजमाने की तैयारी कर रहे हैं। चुनावी माहौल बनाने के लिए गांव की दीवारों, चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर उनके पोस्टर लगाए गए थे। शनिवार की देर रात जब अशोक घर पहुंचे तो कई पोस्टर फटे पड़े मिले। पोस्टर फटने की खबर से उनका पारा चढ़ गया और वह दरवाजे पर बैठकर परिजनों व समर्थकों से इसको लेकर चर्चा करने लगे। इसी बीच गांव का ही शब्बीर अंसारी वहां से गुजर रहा था। ग्रामीणों के मुताबिक पोस्टर फाड़ने की बात पर उसने टिप्पणी कर दी। बस फिर क्या था… चुनावी रंजिश की चिंगारी भड़क उठी। देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। पहले जुबानी वार हुआ, फिर गाली-गलौज और उसके बाद हाथापाई शुरू हो गई।प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि विवाद बढ़ते ही शब्बीर अंसारी ने अचानक पास में रखा धारदार हथियार निकाल लिया और अशोक तिवारी पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। वार इतना तेज था कि अशोक लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े। खून से सना दृश्य देखकर आसपास मौजूद लोग सहम गए। इसी दौरान अपने चाचा को बचाने दौड़े प्रियांशु पर भी हमलावर का गुस्सा फूट पड़ा। नतीजतन बीच-बचाव करने पहुंचे प्रियांशु पर भी धारदार हथियार से हमला कर दिया गया। कुछ ही सेकेंड में दरवाजा खून से लाल हो गया और गांव में अफरा-तफरी मच गई। महिलाओं की चीखें और लोगों की भागदौड़ से पूरा इलाका थर्रा उठा।
सूचना पाकर मौके पर पहुची रामकोला पुलिस ने दोनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामकोला पहुंचाया गया। यहा चिकित्सको ने नाजुक हालत को देखते हुए दोनो घायलों को फौरन गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
चूंकि मामला दो समुदायों से जुड़ा है, इसलिए घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है किन्तु पुलिस के नियंत्रण में है। देर रात अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ वर्मा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे गांव का जायजा लिया। पुलिस ने एहतियातन गांव में फोर्स तैनात कर दी है और हर आने-जाने वाले पर नजर रखी जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत चुनाव को लेकर गांव में पहले से ही खींचतान चल रही थी, लेकिन पोस्टर फाड़ने की घटना ने माहौल को विस्फोटक बना दिया। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है। गांव में तनाव बरकरार है और लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं।







