चार आयोगों में नई नियुक्तियां, सत्ता का सामाजिक संतुलन साधने का बड़ा दांव

चार आयोगों में नई नियुक्तियां, सत्ता का सामाजिक संतुलन साधने का बड़ा दांव
भोपाल यश भारत । मध्यप्रदेश में लंबे समय से लंबित पड़ी अहम नियुक्तियों पर आखिरकार सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए चार प्रमुख आयोगों में नए चेहरों की एंट्री कर दी है। अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला और बाल अधिकारों से जुड़े आयोगों में अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति को महज प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि व्यापक सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार ने राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग की कमान रामलाल रौतेल को सौंपी है जबकि भगत नेताम और मंगल सिंह धुर्वे को सदस्य बनाया गया है। वहीं अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पद पर कैलाश जाटव की नियुक्ति की गई है। महिला सशक्तिकरण के मोर्चे पर रेखा यादव को महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि बाल अधिकारों की निगरानी के लिए डॉ. निवेदिता शर्मा को बाल संरक्षण आयोग की जिम्मेदारी दी गई है। इन नियुक्तियों के जरिए सत्ता ने एक साथ कई सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का संकेत दिया है। खास बात यह है कि ये सभी पद लंबे समय से खाली पड़े थे जिसके चलते सरकार विपक्ष के निशाने पर थी। अब इन नियुक्तियों के जरिए सरकार ने न केवल प्रशासनिक रिक्तता को भरा है, बल्कि राजनीतिक संदेश देने की भी कोशिश की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए सरकार सामाजिक समीकरणों को साधने में जुटी है। हाल ही में सत्तारूढ़ दल द्वारा विभिन्न संगठनों में भी नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद इन आयोगों में की गई नियुक्तियों को उसी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। कुल मिलाकर यह कदम सरकार के लिए प्रशासनिक मजबूती के साथ साथ चुनावी रणनीति को धार देने वाला माना जा रहा है।






