सागर , यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ बुंदेलखंड में अखाड़ा संस्कृति के पुरोधा और मार्शल आर्ट के ध्वजवाहक पद्मश्री भगवान दास रैकवार “दाऊ” का भोपाल के एम्स अस्पताल में शनिवार को निधन हो गया है। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे तथा वेंटिलेटर सपोर्ट पर जिंदगी की जंग से जूझ रहे थे। पिछली 28 मार्च को शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में वे अंतिम बार सार्वजनिक रूप से सामने आए थे।
भारतीय स्टेट बैंक में छोटी सी नौकरी शुरू करने के साथ उन्होंने ऐतिहासिक छत्रसाल अखाड़े में शारीरिक दांव पेंच के अलावा प्राचीन शस्त्र कला को मार्शल आर्ट के रूप में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारतीय पारंपरिक कला के रुप में मार्शल आर्ट और अखाड़ा विद्या के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रशिक्षण में उनके अमूल्य योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2026 का पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया था। वे पिछले कई दिनों से अस्वस्थ थे तथा पिछले 17 मार्च से स्थानीय निजी अस्पताल में इलाज के लिए उन्हें भर्ती कराया था। इसी बीच गत 28 मार्च को शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में आयोजित वार्षिक स्नेह सम्मेलन में वे विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए थे जो उनका अंतिम सार्वजनिक कार्यक्रम था। उसके बाद उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आने के चलते 7 अप्रैल को उन्हें बेहतर उपचार के लिए AIIMS भोपाल रेफर किया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
पद्मश्री भगवान दास दाऊ के निधन से बुंदेलखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को अपूरणीय क्षति पहुंची है। उनके जाने से अखाड़ा परंपरा के साथ ही मार्शल आर्ट के रूप में शस्त्र कला का एक युग समाप्त हो गया है। यश भारत परिवार उनके निधन पर गहन शोक व्यक्त करते हुए उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता है।
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